हिमाचल के सभी शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू होगी, 100 छात्रों पर एक काउंसलर तैनात होगा

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हिमाचल प्रदेश के सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। स्कूल कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटर सभी में यह नियम लागू होगा। निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली की ओर से सभी जिलों के उप निदेशकों को इस संबंध में पत्र जारी किया है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों व 15 सूत्रीय गाइडलाइन के बारे में भी बताया है।

विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले प्रत्येक शिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति करनी होगी। जिन संस्थानों में छात्र संख्या कम है, उन्हें भी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से औपचारिक रेफरल व्यवस्था विकसित करनी होगी।

परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को गोपनीय या नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध करवाना होगा। संस्थानों को मेरिट के आधार पर बैच विभाजन, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और विद्यार्थियों पर उनकी क्षमता से अधिक शैक्षणिक दबाव डालने जैसी प्रथाओं से बचने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाकर हर वर्ष उसकी समीक्षा करनी होगी। इसे वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा।

शिक्षक व गैर शिक्षकों को भी प्रशिक्षण

शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वर्ष में कम से कम दो बार मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या के संकेतों की पहचान, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता और रेफरल प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग, और अन्य संवेदनशील वर्गों के विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया गया है। रैगिंग, बुलिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, धर्म, लिंग या अन्य आधार पर होने वाले भेदभाव के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं।

यदि किसी संस्थान की लापरवाही के कारण छात्र आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास जैसी घटना होती है तो संबंधित संस्थान की जवाबदेही तय की जा सकती है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के सभी संस्थान प्रमुखों को इन आदेशों से तुरंत अवगत कराएं और इनके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी भी करें।

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