ओडिशा के केंदुझर जिले में पुलिस और न्यायिक व्यवस्था के बीच समन्वय की कमी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अदालत में लगातार दो दिनों तक सुनवाई नहीं हो पाने के कारण पुलिस को एक आरोपी को सशर्त जमानत पर रिहा करना पड़ा। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, तेलकोई थाना पुलिस ने पुराने मामले में कोर्ट द्वारा जारी वारंट के आधार पर चंद्रमणि नायक को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना चाहती थी।
लेकिन पहले दिन न्यायिक दंडाधिकारी के व्यस्त रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। पुलिसकर्मी पूरे दिन अदालत परिसर में इंतजार करते रहे, लेकिन मामला सूचीबद्ध नहीं हो पाया।
दूसरे दिन भी सुनवाई नहीं होने से पुलिस की परेशानी बढ़ी
अगले दिन पुलिस ने दोबारा आरोपी को कोर्ट में पेश किया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। लगातार दूसरे दिन भी सुनवाई नहीं होने से पुलिस की परेशानी और बढ़ गई।
कानूनी प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपी को अदालत में पेश करना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर हिरासत जारी रखना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
ऐसे में कानूनी बाध्यता के चलते पुलिस को आखिरकार आरोपी चंद्रमणि नायक को सशर्त जमानत पर छोड़ना पड़ा। घटना के बाद पुलिस महकमे में भी असंतोष देखा गया।
न्यायिक प्रक्रिया में देरी का फायदा आरोपी को
स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी का सीधा फायदा आरोपी को मिल गया। वहीं आरोपी के वकील ने भी मामले के संचालन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण को संबंधित विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।
यह घटना पुलिस और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।


