रविवार सुबह 7:20 बजे बरारी पुल पर रोज की तुलना में भीड़ कुछ कम दिखी, लेकिन उमस भरी गर्मी ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी। पूर्व और पश्चिम दोनों दिशा की नावों का परिचालन सामान्य रूप से जारी रहा। पश्चिम दिशा में बड़े-बड़े लोहे की नावें खुलती दिखीं।
सफर कर रहे लोग सुबह से तेज उमस से बचने के लिए सिर पर गमछा, तौलिया और छतरी लेकर निकले थे। पुल और घाट के आसपास वही लोग अधिक दिखे, जो जरूरी काम से भागलपुर आ-जा रहे थे।
45 मिनट का नाव सफर बना परीक्षा, तेज धूप और रोते बच्चे
सुबह 8:30 बजे बरारी घाट से हाई लेवल घाट के लिए बड़ी लोहे वाली नाव चली, जिसमें करीब 40 यात्री सवार थे। इनमें कई लोग पहली बार नाव में सफर कर रहे थे, जबकि कुछ जनगणना ड्यूटी और अन्य जरूरी काम से जा रहे थे।
नाव खुलते ही गंगा की ठंडी हवा ने थोड़ी राहत दी, लेकिन बीच धारा में पहुंचते-पहुंचते तेज धूप और उमस ने स्थिति कठिन कर दी। यात्रियों के हाथ में मौजूद पानी की बोतलें गर्म हो गईं और बच्चे रोते नजर आए।
श्रवण दास ने बताया कि वह परिवार सहित घर लौट रहे हैं। वहीं अलीगंज के मोहम्मद मंसूर आलम अपनी पत्नी और बच्चे के साथ बड़ी अम्मी के इंतकाल के बाद गांव जा रहे थे। उनकी गोद में बच्चा प्यास और गर्मी से परेशान दिखा। कुछ यात्रियों ने नाव में लगे डब्बे से गंगा का पानी पीने की कोशिश की, जो सफर के दौरान जोखिम का संकेत दे रही थी।
हाई लेवल घाट पर धूल, जाम और अफरा-तफरी
सुबह 9:30 बजे हाई लेवल घाट पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। कंट्रोल रूम से लगातार ओवरलोडिंग वाली नावों के लिए माइकिंग की जा रही थी, लेकिन भीड़ कम नहीं हो रही थी।
नाव से उतरते समय एक बुलेट मोटरसाइकिल फिसलकर गिर गई, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मची। घाट पर पर्याप्त रुकने की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग छांव तलाशते नजर आए।
घाट किनारे ऑटो और टोटो की अव्यवस्थित कतारों से जाम की स्थिति बनी रही। सामान लेकर जा रहे यात्रियों को परेशानी हुई, जबकि तेज धूप में उड़ती धूल ने मुश्किल और बढ़ा दी। दूध कारोबारी नाव पर चढ़ने और उतरने के दौरान एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में धक्का-मुक्की करते दिखे।
हाई लेवल से नवगछिया तक का सफर सिर्फ 12 मिनट में
हाई लेवल घाट से नाव पार कर नवगछिया जीरोमाइल तक का करीब आठ किलोमीटर का सफर रविवार को महज 12 मिनट में पूरा हुआ। पहले इस दूरी को तय करने में लगभग 30-35 मिनट लगते थे।
भारी वाहनों और ट्रकों की लंबी कतार के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती थी, लेकिन रविवार को सड़क पर अजीब सा सन्नाटा दिखाई दिया। यातायात लगभग थम गया और केवल इक्का-दुक्का बस और छोटी गाड़ियां ही नजर आईं।
कई जगह सड़क एक-एक किलोमीटर तक खाली नजर आई। जगतपुर के पास सड़क किनारे मक्का सूखता दिखा, जो आम दिनों में शायद ही दिखाई देता। अधिकतर पेट्रोल पंप भी शांत रहे।
रिलायंस पेट्रोल पंप के एक कर्मी ने बताया कि स्थिति काफी खराब हो गई है। पहले जहां दिनभर भीड़ रहती थी, अब मुश्किल से 30-40 लोग ही पेट्रोल भराने पहुंचे।


