केंद्र सरकार बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के तहत 10,211 करोड़ रुपये की लागत से 736 बांधों का आधुनिकीकरण कर रही है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार इसके तहत 191 बांधों के लिए 5,053 करोड़ रुपये के पुनर्वास प्रस्तावों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और 31 मार्च, 2025 तक 43 बांधों पर पुनर्वास कार्य पूरा हो चुका है।
मंत्रालय ने कहा कि अक्टूबर 2021 में शुरू किए गए डीआरआइपी के दूसरे और तीसरे चरण में 19 राज्यों और तीन केंद्रीय एजेंसियों – केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के 736 बांध शामिल हैं।
परियोजना के दूसरे और तीसरे चरण के तहत जिन प्रमुख बांधों की सुरक्षा में सुधार किया जाएगा उनमें भाखरा बांध (हिमाचल प्रदेश), रंजीत सागर बांध (पंजाब), गांधी सागर बांध (मध्य प्रदेश), जिरगो बांध (उत्तर प्रदेश) और सिलाबती बैराज (बंगाल) शामिल हैं।
डीआरआइपी के दूसरे और तीसरे चरण के लिए कुल परियोजना लागत 10,211 करोड़ रुपये है – जिसमें से 5,107 करोड़ रुपये दूसरे चरण के लिए और 5,104 करोड़ रुपये तीसरे चरण के लिए हैं।
इसमें से सात हजार करोड़ रुपये बाहरी ऋण सहायता के रूप में दिए जा रहे हैं, जबकि 3,211 करोड़ रुपये सहभागी राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा वहन किए जा रहे हैं।
दूसरे चरण में विश्व बैंक और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआइआइबी) में भी फंडिंग मिल रही है। दूसरे और तीसरे चरण को मिलाकर योजना की अवधि 10 साल है।
परियोजना का उद्देश्य पुराने होते बांधों की संरचनात्मक मजबूती, जल संग्रहण क्षमता और परिचालन दक्षता को बढ़ाना, रखरखाव के लिए राजस्व जुटाने के उपाय करना शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि डीआरआइपी दुनिया के सबसे बड़े बांध पुनर्वास कार्यक्रमों में से एक है। भारत 6,628 बांधों के साथ विश्व में तीसरे स्थान पर है, जिनमें से 6,545 चालू हैं और 83 निर्माणाधीन हैं।
इन बांधों की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 330 अरब घन मीटर है और ये राष्ट्रीय खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन बांधों में से 26 प्रतिशत से अधिक, यानी 1,681 तो 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। 291 बांध 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं।
डीआरआईपी को तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। विश्व बैंक के सहयोग से डीआरआइपी का पहला चरण अप्रैल 2012 में शुरू किया गया था और यह 2021 तक चला। इसमें झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड सहित सात राज्यों के 223 बांध शामिल थे।
डीआरआइपी के प्रथम चरण की प्रमुख उपलब्धियों में एक डैम हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन मॉनिटरिंग एप्लीकेशन (धर्म) की शुरुआत थी, जो बांध सुरक्षा निगरानी और डाटा प्रबंधन के लिए डिजिटल प्लेटफार्म है। धर्म जैसे डिजिटल प्लेटफार्म रियल टाइम निगरानी और डाटा-आधारित बांध सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत कर रहे हैं।


