औसत छात्र, लेकिन NEET में असाधारण स्कोर… राजस्थान के 5 भाई-बहनों का अनोखा मामला

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नीट परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच के केंद्र में अब राजस्थान का बीवाल परिवार आ गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में राजस्थान के जमवा रामगढ़ से दिनेश बीवाल, उनके भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल के बेटे विकास बीवाल को गिरफ्तार किया है।

जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस परिवार ने न सिर्फ इस साल पेपर खरीदा, बल्कि पिछले साल भी खास मदद के जरिए अपने बच्चों का दाखिला सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कराया था।

एक ही परिवार से 5 बच्चे बने डॉक्टर

जांच अधिकारियों के मुताबिक, बीवाल परिवार के इस तरह अचानक आए असाधारण नतीजों ने सबसे पहले संदेह पैदा किया। पिछले साल इस परिवार के पांच बच्चों ने एक साथ NEET परीक्षा पास की थी और अलग-अलग प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट हासिल की थी।

6 नवंबर 2025 को दिनेश बीवाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर कर इस बड़ी कामयाबी का जश्न भी मनाया था। सीकर के कोचिंग संस्थानों ने भी अपने विज्ञापनों में इन बच्चों की तस्वीरों का जमकर इस्तेमाल किया था। लेकिन अब यह पूरी कामयाबी जांच के दायरे में है।

कॉलेज से गायब हुआ गिरफ्तार मेडिकल छात्र

मांगीलाल बीवाल का बेटा विकास बीवाल सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS प्रथम वर्ष का छात्र है, उसे CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। विकास 11 मई से कॉलेज से लापता था, जिसके दो दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हुई।

सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बी.पी. मीना ने बताया कि विकास जनवरी से ही कॉलेज से लगातार गायब था। उसकी उपस्थिति इतनी कम थी कि वह महीने में केवल एक या दो बार ही कॉलेज आता था।

शिक्षकों के फीडबैक के अनुसार, उसका शैक्षणिक प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था और कॉलेज में हुए टेस्ट में उसने औसतन केवल 30% स्कोर किया था। रिकॉर्ड बताते हैं कि कक्षा 12वीं में महज 55% अंक लाने वाले विकास ने NEET जैसी कठिन परीक्षा में अचानक 86% स्कोर कर सरकारी सीट हासिल कर ली थी।

बाकी 4 कजिन भी कॉलेजों से हुईं लापता

गिरफ्तारी की खबर फैलते ही परिवार की अन्य चार लड़कियां, जो पिछले साल NEET पास कर अलग-अलग राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रही थीं, अचानक लापता हो गई हैं।

दिवंगत भाई घनश्याम की बेटी पलक: पलक जयपुर के मशहूर SMS मेडिकल कॉलेज की छात्रा है। उसने कक्षा 10वीं में 93% और 12वीं में 89% के बाद NEET में 98.61 परसेंटाइल हासिल किए थे। कॉलेज की एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. मोनिका जैन के मुताबिक, पलक कॉलेज टेस्ट में एक औसत छात्रा थी। जैसे ही उसके चाचा दिनेश की गिरफ्तारी की खबर आई, वह हॉस्टल से बिना बताए गायब हो गई।

मांगीलाल की बेटी प्रगति: दौसा के नवल किशोर शर्मा मेडिकल कॉलेज की छात्रा प्रगति ने कक्षा 10वीं में 69%, 12वीं (कोविड वर्ष) में 91% और NEET में 89% अंक हासिल किए थे। अपने पिता और भाई की गिरफ्तारी वाले दिन (बुधवार) से ही वह कॉलेज से छुट्टी लेकर गायब है।

घनश्याम की दूसरी बेटी सानिया: मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही सानिया ने 12वीं में 89% और NEET में 94.07 परसेंटाइल हासिल किए थे। वह भी फिलहाल लापता है।

दिनेश बीवाल की बेटी गुंजन: वाराणसी के सरकारी मेडिकल कॉलेज की छात्रा गुंजन ने 12वीं में 70% अंक हासिल किए थे। कोचिंग के टेस्ट में उसका स्कोर 720 में से महज 320 से 342 के बीच रहता था, लेकिन मुख्य NEET परीक्षा में उसने अचानक 92.53 परसेंटाइल हासिल कर लिए। गुंजन का फोन भी बंद है और वह गायब है।

अगली पीढ़ी को भी डॉक्टर बनाने की थी तैयारी

पिछले साल की सफलता के बाद इस साल परिवार दो और बच्चों दिनेश के बेटे ऋषि बीवाल और मांगीलाल के बेटे अमन को किसी भी कीमत पर मेडिकल कॉलेज पहुंचाना चाहता था। कक्षा 12वीं में महज 50% और 10वीं में ग्रेस मार्क्स के साथ 43.67% लाने वाले ऋषि और बेहद औसत छात्र अमन ने इस साल की NEET परीक्षा दी थी।

आरोप है कि परिवार ने इस साल भी भारी रकम चुकाकर पेपर लीक नेटवर्क से सौदा किया था ताकि इन दोनों को पास कराया जा सके।

कोचिंग विज्ञापनों की होगी जांच

जांच एजेंसियां अब दिनेश बीवाल के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और सीकर के कोचिंग सेंटरों द्वारा जारी किए गए उन प्रचार पोस्टरों की कड़ियों को जोड़ रही हैं, जिनमें इन बच्चों को टॉपर दिखाया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक ही परिवार के इतने सारे बच्चों का अचानक बेहद औसत बैकग्राउंड के बावजूद देश की सबसे कठिन परीक्षा में इतना शानदार प्रदर्शन करना, निश्चित रूप से गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। CBI इस पूरे सिंडिकेट और पिछले सालों के उनके रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटी है।

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