पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ईडी शनिवार को उन्हें दोबारा अदालत में पेश करेगी।
संजीव अरोड़ा की कंपनी ने 12 मई 2023 से 27 अक्टूबर 2023 के बीच लगभग 157.12 करोड़ मूल्य के मोबाइल फोन बेचे। जिनमें से करीब 102.50 करोड़ का निर्यात यूएई की दो कंपनियों मैसर्स फोर्ट बैल टेलीकॉम और मैसर्स ड्रैगन ग्लोबल को किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौ मई को चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने के बाद उसी रात गुरुग्राम स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत में रात 11:20 बजे पेशी हुई। जहां ईडी ने पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड मांगी। सुनवाई के बाद अदालत ने संजीव अरोड़ा को सात दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया।
पूरा कारोबार फर्जी बिलिंग, शेल कंपनियों और हवाला से संचालित हुआ
ईडी का दावा है कि जांच के दौरान यह सामने आया कि इन विदेशी कंपनियों के पीछे जुड़े लोग संजीव अरोड़ा की कंपनी हैंपटन स्काई रियलिटी और फिनडोक समूह से संबद्ध थे। पूरा कारोबार फर्जी बिलिंग, शेल कंपनियों और हवाला जैसी लेयरिंग के जरिये संचालित किया गया।
मामला करीब 157.12 करोड़ के मोबाइल फोन कारोबार और कथित मनी लान्ड्रिंग से जुड़ा है। 2023-24 के दौरान हैंपटन स्काई रियलिटी लिमिटेड (एचएसआरएल) ने मोबाइल फोन बिक्री और निर्यात का बड़ा कारोबार दिखाया।
मामले की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 को फेमा के तहत की गई तलाशी कार्रवाई से हुई। ईडी ने एचएसआरएल और उससे जुड़े परिसरों पर छापेमारी की।
जांच में पाया गया कि मोबाइल फोन सप्लाई करने वाली कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं। इनमें से कई फर्मों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द या निलंबित पाया गया। कुछ कंपनियां आयकर रिटर्न तक दाखिल नहीं कर रही थीं।
संजीव के बेटे काव्य अरोड़ा से भी हुई पूछताछ
जांच के दौरान कंपनी के मौजूदा प्रबंध निदेशक और संजीव अरोड़ा के बेटे काव्य अरोड़ा से भी पूछताछ हुई। उन्होंने बयान में कहा कि मोबाइल निर्यात कारोबार उनके पिता संजीव अरोड़ा देखते थे। जबकि वह स्वयं रियल एस्टेट कारोबार संभालते थे।
कंपनी के सीएफओ दीपक शर्मा ने भी माना कि कंपनी ने दुबई को बड़ी मात्रा में आईफोन निर्यात किए थे और पूरा आपरेशन घिटोरनी स्थित कार्यालय से संचालित होता था।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी सप्लायर कंपनियों के जरिये रकम को परत दर परत विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया। एसके एंटरप्राइजेज नामक एक फर्म के खाते में करीब 27.73 करोड़ भेजे गए।
बाद में फर्म के कथित संचालक कमाल अहमद ने बयान दिया कि वह दिहाड़ी मजदूर है और उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल दूसरे लोगों ने किया।


