गोरखपुर में बनेगा पहला डॉग शेल्टर, आवारा कुत्तों को मिलेगी नई पनाह

 शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम की ओर से किया जा रहा प्रयास अब कुछ आकार लेने लगा है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद नगर निगम ने शहर का पहला डाग शेल्टर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह शेल्टर गुलरिहा क्षेत्र के अमवा में एबीसी सेंटर के बगल में उपलब्ध भूमि पर बनाया जाएगा। निर्माण विभाग ने करीब 25 हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल वाले डाग शेल्टर का प्रारूप तैयार कर लिया है। हालांकि यह न सिर्फ मानक से थोड़ा कम है बल्कि आवारा आतंक से निजात की छोटी सी पहल ही है।

एक अनुमान के अनुसार, शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 50 हजार से भी ज्यादा है। इतने ज्यादा आवारा कुत्तों को रखने के लिए करीब 14 लाख वर्ग फीट भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन नगर निगम की ओर से शुरुआती चरण में दो स्थानों पर डाग शेल्टर बनाने की कवायद शुरू की गई है।

इनमें एक गुलरिहा और दूसरा जंगल हकीम नंबर दो में भूमि चिह्नित है। इनमें से गुलरिहा में बनने की शुरुआत हो रही है। इसके लिए नगर निगम के निर्माण विभाग ने प्रारूप तैयार कर लिया है। हालांकि यह भूमि एनिमल वेलफेयर बोर्ड आफ इंडिया के मानक से थोड़ा कम है। प्रविधान के अनुसार 1000 कुत्तों के लिए 27 हजार वर्ग फीट भूमि की आवश्यकता होती है।

नगर निगम के अवर अभियंता विवेकानंद ने बताया कि एबीसी सेंटर के पास उपलब्ध निगम की भूमि पर करीब 25 हजार वर्ग फीट आकार का डाग शेल्टर का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। अंतिम रूप से स्वीकृति के बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, मुख्य अभियंता अमित शर्मा ने कहा कि डाग शेल्टर के मानकों को ध्यान में रखते हुए इसका निर्माण किया जाएगा।

सार्वजनिक स्थानों से पकड़े जाएंगे आवारा कुत्ते
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डा. रोबिन चंद्रा ने बताया कि इस केंद्र में 900 से 950 कुत्तों को रखा जा सकेगा। प्राथमिकता के आधार पर रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, मंदिर परिसर, स्कूलों और सरकारी दफ्तरों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों को पकड़कर यहां रखा जाएगा। शेल्टर में कुत्तों के रहने, भोजन, उपचार और वैक्सीनेशन की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही बीमार और आक्रामक कुत्तों की निगरानी भी की जाएगी, ताकि शहर में लोगों को राहत मिल सके।

भोजन और इलाज पर आएगा बड़ा खर्च
एनिमल वेलफेयर बोर्ड आफ इंडिया के मानकों के अनुसार एक कुत्ते के भोजन पर प्रतिदिन 40 से 50 रुपये तक खर्च आता है। इसके अलावा वैक्सीनेशन, डिवर्मिंग और अन्य चिकित्सा सुविधाओं पर अलग से खर्च करना पड़ता है। ऐसे में नगर निगम को इस शेल्टर के संचालन के लिए हर महीने अच्छी-खासी राशि खर्च करनी पड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि शेल्टर संचालन के लिए अलग बजट और संसाधनों की व्यवस्था भी की जाएगी। पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।

हेल्पलाइन नंबर भी हैं जारी
नगर निगम और एबीसी सेंटर की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। ताकि लोग आवारा कुत्तों से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायत मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेगी। नगर निगम का हेल्पलाइन नंबर -8810709390 और एबीसी सेंटर का हेल्पलाइन नंबर 8810709376 है, जिस पर फोन किया जा सकता है।

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