जमुई के स्कूल में RTI पर हेडमास्टर का अटपटा जवाब, चौहद्दी की जगह गुरुजी ने लिख दिए चारों दिशाओं के नाम

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शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक अजीबोगरीब मामला नगर परिषद क्षेत्र स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बिहारी स्कूल से सामने आया है। यहां सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विद्यालय की जमीन और उसकी चौहद्दी की जानकारी मांगे जाने पर प्रधानाध्यापक द्वारा दिया गया जवाब इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, एक आरटीआई कार्यकर्ता ने विद्यालय की जमीन की स्थिति और उसकी चारों दिशाओं की स्पष्ट जानकारी मांगी थी।

सामान्यतः किसी भी सरकारी या निजी संपत्ति की चौहद्दी में उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम दिशा में स्थित घर, सड़क, सरकारी भूमि, आहर, पोखर अथवा अन्य सीमाओं का उल्लेख किया जाता है, लेकिन विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुरारी मंडल ने जवाब में विद्यालय की लंबाई-चौड़ाई लिखते हुए चौहद्दी के स्थान पर सिर्फ उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम दिशा का नाम भर लिखकर सूचना भेज दी।

आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि विद्यालय की जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से आवेदन दिया गया था, लेकिन प्राप्त जवाब देखकर वह खुद हैरान रह गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मांगी गई अन्य सूचनाओं का भी आधा-अधूरा जवाब दिया गया है, जिसके बाद अब प्रथम अपील दायर करने की तैयारी की जा रही है।

चौहद्दी के नाम पर भूगोल का ज्ञान

प्रधानाध्यापक के इस जवाब के वायरल होने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मोहल्ले में चर्चा है कि जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक को ही स्कूल की सीमा की सही जानकारी नहीं है तो वे बच्चों को बिहार और भारत की चौहद्दी का ज्ञान कैसे देंगे।

स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि एक विद्यालय प्रधान को स्कूल की संपत्ति, भूमि और उसकी सीमाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए। चौहद्दी के नाम पर सिर्फ दिशाओं का उल्लेख करना गैर जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।

स्कूल की सुरक्षा पर भी सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय प्रशासन को अपनी जमीन की स्पष्ट जानकारी नहीं होगी तो अतिक्रमण से उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। लोगों ने शिक्षा विभाग से मामले की जांच कर संबंधित प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि प्रधानाध्यापक कई वर्षों से विद्यालय में पदस्थापित हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उन्हें वास्तव में विद्यालय की सीमा की जानकारी नहीं है, या फिर सूचना अधिकार अधिनियम को हल्के में लिया जा रहा है।

इधर, प्रधानाध्यापक का पक्ष जानने के लिए जब दैनिक जागरण संवाददाता ने उनके नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

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