रविवार को तमिलनाडु की राजनीति और एआईएडीएमके में एक बार फिर भारी उथल-पुथल मच गई। पूर्व मंत्री सी. वी. षणमुगम ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के खिलाफ 36 नवनिर्वाचित विधायकों को लामबंद कर दिया है। चुनाव में हार के बाद उठी इस बगावत ने पार्टी के दो फाड़ होने का खतरा पैदा कर दिया है।
विद्रोही गुट ने पलानीस्वामी पर एकतरफा फैसले लेने और पार्टी के अस्तित्व से ज्यादा निजी स्वार्थ को तरजीह देने का आरोप लगाया है। बता दें कि एआईएडीएमके ने एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था और 47 सीटें हासिल की थीं, जबकि गठबंधन ने कुल 53 सीटें जीतीं, जिसमें भाजपा की एक सीट शामिल है।
विद्रोही पदाधिकारियों ने अपने अगले कदम की घोषणा करने के लिए सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना बनाई है। षणमुगम खेमे के एक नेता ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईपीएस एआईएडीएमके के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए फैसले ले रहे हैं।
चुनाव के बाद की खींचतान जारी
यह राजनीतिक संकट ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु एक खंडित जनादेश की स्थिति से जूझ रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, षणमुगम और पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाएं तलाशी थीं, क्योंकि विजय की पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ पीछे रह गई थी।
वहीं, सूत्रों का कहना है कि इसके ठीक उलट, ईपीएस गुपचुप तरीके से डीएमके का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
ईपीएस के विद्रोहियों की रणनीति
विधायकों के पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट से लौटने के बाद पलानीस्वामी ने उनके साथ बंद कमरे में बैठक की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार बनाने वाली पार्टी को बधाई देते हुए एक रहस्यमयी पोस्ट किया। इससे इन अटकलों को बल मिला कि डीएमके का समर्थन हासिल करने की उनकी कोशिशें शायद विफल हो गई हैं।
इसके कुछ ही घंटों बाद षणमुगम और 35 विधायक आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए षणमुगम के आवास पर इकट्ठा हुए। सूत्रों ने बताया कि विद्रोही विधायक विश्वास मत के दौरान विजय की पार्टी का समर्थन करने और विधानसभा के भीतर असली AIADMK होने का दावा पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
षणमुगम की नजर अब एआईएडीएमके के विधायक दल के नेता के पद पर है। इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता दोनों प्रतिद्वंद्वी खेमों के बीच सुलह कराने में नाकाम रहे हैं।
मतदाताओं के साथ विश्वासघात
टीओआई के अनुसार, षणमुगम ने ईपीएस पर मतदाताओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव में AIADMK के तीसरे स्थान पर खिसकने के बाद ईपीएस ने उदयनिधि स्टालिन के जरिए सत्तारूढ़ डीएमके का समर्थन मांगने का प्रयास किया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने सीपीआई, सीपीएम और वीसीके सहित अपने सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के दौरान एआईएडीएमके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की संभावनाओं पर चर्चा की थी।


