देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु महानगरों में दहेज संबंधी मामलों का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देश के सभी महानगरों में दर्ज कुल 1,008 दहेज निषेध अधिनियम के मामलों में से 878 मामले अकेले बेंगलुरु में दर्ज किए गए। यह पूरे महानगरों के कुल मामलों का 87% है।
दूसरे स्थान पर रहे लखनऊ में 48 मामले दर्ज किए गए। बेंगलुरु में 2024 में दहेज से संबंधित 25 मौतें भी दर्ज की गईं। हालांकि यह संख्या दिल्ली के 109 मामलों से कम थी, लेकिन चेन्नई, कोझिकोड, कोच्चि और कोयंबटूर सहित कई दक्षिण भारतीय शहरों से अधिक थी, जहां उस वर्ष दहेज से संबंधित कोई मौत दर्ज नहीं की गई। हैदराबाद में ऐसी 14 मौतें दर्ज की गईं।
विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत दर्ज महिलाओं के खिलाफ अपराधों में, बेंगलुरु महानगरों में सबसे ऊपर रहा, जहां 1,051 घटनाएं दर्ज की गईं।
राज्य स्तर पर, कर्नाटक में पतियों या ससुराल वालों द्वारा पत्नियों के साथ क्रूरता के 2,947 मामले दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक 21,266 रही, उसके बाद राजस्थान में 10,578 और महाराष्ट्र में 10,538 मामले दर्ज किए गए।
दहेज हत्या की ‘शर्मनाक लिस्ट’ में फिर टॉप पर दिल्ली
दिल्ली एक बार फिर दहेज के लिए हत्याओं के मामलों में देश के बड़े महानगरों में शिखर पर पहुंच गई है। वहीं, कानपुर दूसरे तो पटना तीसरे नंबर पर है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ के अनुसार दिल्ली में वर्ष 2024 के दौरान दहेज हत्या के 109 मामले दर्ज हुए, जिनमें 111 महिलाओं की मौत हुई। दिल्ली लगातार पांचवें साल इस शर्मनाक सूची में शीर्ष पर बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में प्रति लाख आबादी पर दहेज मौत का अपराध दर 1.4 दर्ज किया गया। हालांकि कोविड काल के मुकाबले मामलों में कुछ कमी आई है, लेकिन आंकड़े अब भी गंभीर सामाजिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
कोविड काल में रही सबसे भयावह स्थिति
दिल्ली में दहेज के लिए हत्याओं का सबसे खराब साल 2021 रहा। उस साल 136 मामले दर्ज हुए और 139 महिलाओं की जान गई थी। अपराध दर 1.8 तक पहुंच गई थी। इसके बाद आंकड़ों में लगातार गिरावट आई।


