भौंरी उत्सव के पावन अवसर पर रविवार को श्रीक्षेत्र पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ निर्माण परंपरा का एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। तीनों रथों के छह नाहाक चक्रों के साथ तीन अख जोड़ने की शुभ रस्म विधि-विधान के साथ संपन्न की गई।
श्रीमंदिर से पूजा पांडा सेवकों द्वारा आज्ञामाला लाए जाने के बाद विश्वकर्मा महाराणा और भोई सेवकों की सहायता से चक्र-अख संयोजन कार्य किया गया। परंपरा के अनुसार प्रत्येक रथ के दो-दो चक्रों में एक-एक अख जोड़ा गया। आगे चलकर कुल 42 चक्र और 21 अख तैयार किए जाएंगे।
रथ निर्माण कार्य का यह नया चरण अक्षय तृतीया से शुरू हुई प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। भौंरी अवसर पर सुबह धूप नीति समाप्त होने के बाद सेवक तीनों रथों के लिए आज्ञामाला लेकर रथखला पहुंचे। इसके बाद विश्वकर्मा महाराणा द्वारा निर्मित चक्रों को भोई सेवकों ने अख से जोड़ा।
इस अवसर पर श्रीमंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी, पुरी जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिड़ा, एसपी प्रतीक सिंह तथा एडीजी सौमेंद्र प्रियदर्शी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में पूरी रस्म शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।
महाप्रभु की रथ निर्माण प्रक्रिया और विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा इस वर्ष भी भक्तों की भारी भीड़ के बीच सुचारु और अनुशासित ढंग से संपन्न हो, इसके लिए सभी ने महाप्रभु से प्रार्थना की।


