महराजगंज बस डिपो स्थानांतरण से निचलौल की रफ्तार थमी, कारोबार से लेकर यात्रियों तक बढ़ीं मुश्किलें

 कभी सीमावर्ती क्षेत्र की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा निचलौल, रोडवेज बस डिपो के महराजगंज स्थानांतरण के बाद लगातार समस्याओं से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिपो हटने से न केवल निचलौल की पहचान प्रभावित हुई, बल्कि व्यापार, रोजगार और यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

डिपो के निचलौल में रहने के दौरान यहां से सिसवा, झुलनीपुर और ठूठीबारी जैसे महत्वपूर्ण लोकल रूटों पर नियमित बसों का संचालन होता था। इससे क्षेत्रीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलती थी और स्थानीय बाजारों में भी व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलती थीं।

व्यापारी बाहर से माल मंगाने को लेकर निश्चिंत रहते थे। डिपो हटने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कम आय का हवाला देकर डिपो को महराजगंज स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि इसके दूरगामी प्रभावों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

डिपो हटने से मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) सुविधा भी प्रभावित हुई है, जिससे नियमित यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। क्षेत्रीय लोगों ने शासन और परिवहन विभाग से निचलौल में पुनः बस संचालन मजबूत करने तथा लोकल रूटों पर नियमित सेवाएं बहाल करने की मांग की है।

रोडवेज डिपो के चलते निचलौल बाजार की आर्थिक गतिविधियां सक्रिय रहती थीं। बसों के संचालन से छोटे दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और मजदूरों को भी रोजगार मिलता था, लेकिन अब रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। -सरयू प्रसाद पांडेय, निचलौल

पहले लोकल बसों से आसानी से छात्र-छात्राओं को कॉलेज आना-जाना हो जाता था, लेकिन अब निजी वाहनों या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों और दैनिक यात्रियों को हो रही है। -सत्येंद्र गुप्ता, निचलौल

फोटो: नौ एमआरजे: पहले परिवहन सुविधा बेहतर होने से बाहर से सामान आसानी से पहुंच जाता था, लेकिन अब बसों की संख्या कम होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। समय से माल नहीं पहुंच पाने के कारण कारोबार में गिरावट आई है। -ओमप्रकाश गुप्ता, निचलौल

निचलौल के विकास के लिए बस डिपो की स्थापना तत्कालीन विधायक शिवेंद्र सिंह ने कराई थी। बस डिपो महराजगंज स्थानांतरित हो जाने के बाद किसी जनप्रतिनिधि ने बस डिपो के लिए कोई प्रयास नहीं किया। -श्याम बिहारी अग्रवाल, निचलौल

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