यूजीसी कानून के विरोध के स्वर जिले में भी तेज होने लगा। ब्राह्मण महासभा, क्षत्रिय महासभा, कायस्थ महासभा समेत सभी सवर्ण संगठनों के पदाधिकारियों व सदस्यों ने यूजीसी कानून के विरोध में विरोध-प्रदर्शन करते हुए पद यात्रा निकाली। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी को ”काला कानून” बताया और ”हम सवर्ण अभागे है, ”तिलक तराजू और तलवार अब नहीं सहेंगे अत्याचार” जैसे स्लोगन के साथ विरोध स्वरूप जमकर नारेबाजी की। सवर्ण संगठन पदाधिकारियों ने 7 फरवरी को एक बार फिर से जिला मुख्यालय में विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया।
यूजीसी का विरोध करते हुए सवर्ण समाज के लोग रविवार को प्रागी तालाब रामलीला मंडप में एकत्रित हुए। कांग्रेस नेता संकटा प्रसाद त्रिपाठी की अगुवाई में संगठन पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पदयात्रा निकाली। यात्रा महेश्वरी देवी मंदिर से होते हुए चौक बाजार, छावनी चौराहे पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी को “काला कानून” बताया। यहां काला कानून वापस लो के नारे लगाए। साथ ही युवाओं ने यूजीसी विरोध की तख्तियां लहराईं।
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून को समाज, शिक्षा व्यवस्था और पारंपरिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। कहा कि सवर्ण समाज अब चुप नहीं बैठेगा और जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा और भविष्य से जुड़ी है।
ऐलान किया कि 7 फरवरी को जिला मुख्यालय में एक बार फिर पदयात्रा निकालकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। विरोध-प्रदर्शन करने वालों में विद्वत्समाज के प्रमुख कृष्णकांत तिवारी, क्षत्रिय महासभा अध्यक्ष राम सिंह कछवाह व रमजोर सिंह चंदेल, अभिषेक बाजपेई, विपिन दीक्षित, कायस्थ समाज के दुर्गाचरण श्रीवास्तव, राजपूत करणी सेना के शिवशरण सिंह पप्पू, नीरज निगम, नीरज तिवारी, श्याम सिंह समेत तमाम लोग शामिल रहे।
जिले में फ्लाप रहा बंद का आह्वान, खुली रहीं दुकानें
यूजीसी के विरोध में राजनीतिक पार्टियों द्वारा किया गया बंद पूरी तरह फ्लाप रहा। व्यापारियों ने भारत बंद को पूरी तरह से नकारते हुए दुकानें खुली रखीं। हालांकि सवर्ण समाज ने भारत बंद के समर्थन में मुख्य बाजार में जुलूस निकाला। जिसका भी कोई असर नहीं पड़ा। जिला मुख्यालय समेत अतर्रा, नरैनी, बबेरू, पैलानी, बदौसा, कमासिन, चिल्ला समेत सभी तहसीलों व ब्लाकों में रविवार को बाजार को कुछ अलग ही माहौल देखने को मिला। सामान्य तौर पर दुकानें रोजमर्रा की तरह खुली रहीं। भारत बंद का असर पूरी तरह से शून्य रहा। देर शाम तक बाजार खुला रहा।


