देशभर में गर्मी का प्रकोप अब बढ़ गया है। लू के थपेड़ों की चपेट में आने से हीटस्ट्रोक की शिकायतें आने लगी हैं। इसी बीच डॉक्टर्स ने बच्चों को गर्मी से बचाकर रखने की अपील की है। बढ़ते तापमान और लगातार हो रही हीटवेव्स के बीच यूनिसेफ ने भी चेतावनी जारी की है कि बच्चों में हीट एग्जॉर्शन (गर्मी से थकान) और हीट स्ट्रोक (लू लगना) वयस्कों की तुलना में बहुत तेजी से होता है।
गंभी हीटस्ट्रोक से जान का खतरा
इस संबंध में बच्चों के डॉक्टर डॉ. जसपाल ने बताया कि बच्चों का शरीर तापमान नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है। छोटे बच्चों में यह समस्या और भी गंभीर होती है क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है। पसीना कम निकलता है। इससे वे पर्यावरण से ज्यादा गर्मी सोख लेते हैं और जल्दी ओवरहीट हो जाते हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो हीट एग्जॉर्शन हीट स्ट्रोक में बदल सकता है, जो मस्तिष्क, हृदय, किडनी जैसे अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा
यूनिसेफ की एक की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र में हीटवेव्स का सामना करने वाले 9 करोड़ 20 लाख से ज्यादा बच्चे प्रभावित हैं, जो क्षेत्र के आधे बच्चों के बराबर है। 2050 तक दुनिया भर के लगभग हर बच्चे को बार-बार हीटवेव्स का सामना करना पड़ सकता है।
ओआरएस का इस्तेमाल करें
डॉक्टर बच्चों में डिहाईड्रेशन से संबंधित बीमारियों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट कर रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में तपिश बढ़ने के साथ ही इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। छोटे बच्चे डिहाईड्रेशन, रोटावायरस, उल्टी और दस्त के लक्षणों के साथ अस्पताल आ रहे हैं। एनसीआर में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि वे उपचार में हल्के मामलों में ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस) का प्रयोग करें।
हीट एग्जॉर्शन के लक्षण (शरीर का तापमान 38°C से 40°C के बीच)
- चिड़चिड़ापन, थकान, चक्कर या कमजोरी
- चिपचिपी त्वचा, अत्यधिक प्यास
- भूख न लगना, उल्टी-दस्त या सिरदर्द
- हीट रैश, बेहोशी, तेज नब्ज या सांस
- पसीना ज्यादा आना, हाथ-पैर या पेट में ऐंठन
हीट एग्जॉर्शन होने पर 30 मिनट के अंदर बच्चे को ठंडा करना जरूरी है, वरना स्थिति हीट स्ट्रोक में बदल सकती है।
हीट स्ट्रोक के गंभीर लक्षण (शरीर का तापमान 40.5°C या इससे ज्यादा)
- उल्टी, लाल त्वचा
- तेज नब्ज और सांस
- सूखी और गर्म त्वचा (पसीना न आना)
- भ्रम, बोलने में दिक्कत, दौरे या बेहोशी
बचाव के उपाय
- दोपहर के समय बच्चों को बाहर जाने से रोकें।
- उन्हें बार-बार पानी पिलाएं। 6 महीने से छोटे शिशुओं को केवल स्तनपान या फॉर्मूला मिल्क दें।
- बच्चों को हल्के कपड़े पहनाएं।
- पार्किंग वाली कार में कभी बच्चे को अकेला न छोड़ें।
- रात के समय भी हल्के कपड़े पहनाएं।
- पानी के पास खेलते समय पूर्ण निगरानी रखें। विश्वस्तर पर हर साल 5 साल से कम उम्र के करीब 75,000 बच्चे डूबने से जान गंवा बैठते हैं।
हीट एग्जॉर्शन के लक्षण दिखने पर क्या करें?
- हीट एग्जॉर्शन में तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं
- अनावश्यक कपड़े उतारें
- ठंडा पानी पिलाएं
- ठंडे पानी से नहलाएं।
- हीट स्ट्रोक में तुरंत डॉक्टर या अस्पताल ले जाएं।
डॉ. जसपाल ने माता-पिता और शिक्षकों को सलाह दी है कि वे बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए वयस्कों से भी ज्यादा सतर्क रहें। बढ़ते जलवायु परिवर्तन के बीच ये उपाय बच्चों की जान बचाने में कारगर साबित हो सकते हैं।


