स्वास्थ्य विभाग में Katihar DM के एक्शन से हड़कंप, 2 अधिकारियों का वेतन रोका; महिला दलाल को भेजा जेल

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 जिले के स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और अनियमितताओं के खिलाफ जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी का सख्त एक्शन लगातार जारी है। हाल के दिनों में डीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए एक के बाद एक कड़े फैसले लिए हैं। जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

सबसे पहले अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने सघन जांच अभियान चलाया था। इस दौरान तीन सेंटरों को सील किया गया, जबकि एक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

इसके अलावा, सदर अस्पताल में बिना ड्रेस कोड के पहुंचने वाली आशा कर्मी को चयनमुक्त कर दिया गया। वहीं, अस्पताल परिसर में सक्रिय महिला दलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

अब जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीन रवैये को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दो अधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कार्रवाई की जद में जिला स्वास्थ्य समिति के प्रभारी कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. किसलय कुमार और जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी अखिलेश सिंह शामिल हैं।

दोनों पर विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने निर्देश दिया कि सरकार की योजनाओं को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, दोनों अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई गई है, लेकिन यदि उनकी कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो विभागीय स्तर पर और कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखें।

इस लगातार हो रही कार्रवाई का असर अब साफ तौर पर विभाग में दिखने लगा है। अधिकारी और कर्मचारी सतर्क हो गए हैं और अपने-अपने कार्यों के निष्पादन में गंभीरता दिखा रहे हैं।

प्रशासन के इस कड़े रुख को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और अनुशासन कायम करने की दिशा में कितना अहम होता है आने वाले समय में देखा जा सकता है।

दिव्यांग प्रमाण-पत्र नवीकरण में रिश्वत का आरोप, व्यवस्था पर उठे सवाल:

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के नवीकरण में कथित रूप से अवैध वसूली के आरोप ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरारी थाना क्षेत्र के भंडारतल गांव निवासी दिव्यांग राजेश मंडल ने पूर्व में उनसे प्रमाण-पत्र नवीकरण के लिए सात हजार रुपये की मांग की शिकायत कर चुके है।

आरोप था कि यह मांग सदर अस्पताल परिसर में सक्रिय एक दलाल द्वारा की गई, जो एक हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र कुमार के साथ रहता है। मामले की शिकायत अनुमंडल पदाधिकारी प्रद्युमन सिंह यादव से की थी।

एसडीओ की अनुशंसा पर सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया था, लेकिन इसके बाद भी तीन दिव्यांग मुन्नी कुमारी, कल्पना कुमारी, वसंती देवी ने वरीय अधिकारी के समक्ष दिव्यांग प्रमाण-पत्र नवीकरण में रिश्वत की मांग पर शिकायत दर्ज कराए है।

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज के लिए भी यदि रिश्वत की मांग हो रही है, तो व्यवस्था कितनी पारदर्शी है।

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