हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में एक व्यक्ति को अपने कुत्ते का पंजीकरण न करवाना महंगा पड़ गया। नगर निगम मंडी ने पालतू कुत्ते का पंजीकरण न करवाने पर पैलेस कालोनी वार्ड निवासी का 9,300 रुपये का चालान काटा है। निगम की ओर से बार-बार हिदायत देने और कर्मचारियों के माध्यम से सूचना भेजने के बावजूद उक्त व्यक्ति ने कुत्ते का पंजीकरण करवाने में रुचि नहीं दिखाई।
15 दिन में जुर्माना राशि न दी तो लगेगा अतिरिक्त शुल्क
नगर निगम आयुक्त रोहित राठौर ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति को 15 दिन के भीतर जुर्माना राशि जमा करने का समय दिया है। यदि इस अवधि में शुल्क जमा नहीं किया जाता और कुत्ते पंजीकरण नहीं करवाया जाता है तो 100 रुपये प्रति दिन की दर से अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।
नगर निगम मंडी में अब तक केवल 100 पालतू कुत्तों का ही पंजीकरण हो पाया है। सिटीजन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन सुविधा शुरू होने के बाद से पंजीकरण की गति धीमी है। कई लोग कर्मचारियों के घर पहुंचने पर पालतू जानवरों को छिपा रहे हैं।
इसलिए बनाया है पंजीकरण का नियम
नगर निगम अधिनियम के अनुसार शहरी सीमा के भीतर किसी भी पालतू जानवर विशेषकर कुत्ते को रखने के लिए स्थानीय निकाय के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। यह नियम सार्वजनिक सुरक्षा, स्वच्छता और रैबीज जैसी बीमारियों के नियंत्रण के लिए बनाया गया है।
अधिनियम के तहत, बिना लाइसेंस या पंजीकरण के कुत्ता रखना अवैध माना जाता है और नगर निगम को भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ जानवर को जब्त करने का भी अधिकार है। निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत पोर्टल पर जाकर अपने पालतू कुत्तों का पंजीकरण करें।


