ललितपुर में अनूठा विवाह, संविधान को साक्षी मानकर एक-दूजे के हो गए सौरभ और नेहा

किसी भी वैवाहिक समारोह में युवक व युवती वर माला डालने के मंत्रोचार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे के हो जाते हैं, लेकिन दक्षिणी भाग में उत्तर प्रदेश के अंतिम जिले ललितपुर में हुआ अनोखा विवाह काफी चर्चा में है। गुरुवार रात को ललितपुर में ऐसा अनूठा विवाह सम्पन्न हुआ, जो परंपरागत रीति-रिवाजों से इतर संवैधानिक मूल्यों और आधुनिक विचारधारा की नई इबारत लिख गया।

शांति देहदान चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरुवार को ग्राम बिरधा के युवक सौरभ और ग्राम सौरई की युवती नेहा का विवाह पूरी तरह संवैधानिक पद्धति से सम्पन्न हुआ। इस विवाह में न तो अग्नि के चारों ओर सात फेरे हुए और न ही कोई संस्कार, बल्कि भारत के संविधान की उद्देशिका को पढ़कर वर-वधू एक-दूसरे के हमसफर बने। इस समारोह में मास्टर ऑफ सेरेमनी के माध्यम से हर रस्म को संवैधानिक और सामाजिक अर्थों के साथ जोड़ा गया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत वर-वधू के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के माता-पिता को मंच पर आमंत्रित कर वंदे मातरम् गायन के बीच उनका सम्मान किया गया। वर-वधू ने एक-दूसरे के माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जिसे ट्रस्ट ने जन्म देने वालों के प्रति सर्वोच्च दायित्व बताया।

विवाह का सबसे मुख्य आकर्षण रहा संविधान का सम्मान। वर और वधू ने सम्विधान की प्रतिकृति के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की और मौन नमन किया। इसके बाद ट्रस्ट के प्रतिनिधि डॉ. केएस यादव ने भारत के संविधान की उद्देशिका के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई।

वर-वधू ने हाथ जोड़कर सम्विधान को अपना सर्वोच्च गुरु मानते हुए एक-दूसरे को जीवनभर साथ निभाने और समानता के भाव से रहने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने संविधान की परिक्रमा की।

रस्मों के बीच वर सौरभ ने नेहा को प्रतीकात्मक रूप से मंगलसूत्र पहनाया और सिंदूर लगाया। इसके बाद वर-वधू उनके माता-पिता और दो गवाहों ने शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर किए। ट्रस्ट के संस्थापक खुशाल चंद्र साहू ने आधिकारिक विवाह प्रमाण-पत्र और सम्विधान की एक प्रति नवदम्पति को उपहार स्वरूप भेंट की।

समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान जन गण मन के साथ हुआ। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए ग्राम बिरधा और सौरई से भारी संख्या में पुरुष व महिलाएं मौजूद रहे। इस दौरान ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष सुषमा साध, वंदना मेहता, जेपी यादव, सामंत सिंह यादव सहित वर पक्ष से पिता मूलचंद, सोमती और वधू पक्ष से पिता श्रीराम, मदनलाल व अन्य परिजन उपस्थित रहे।

ट्रस्ट का संदेश

संस्थापक शांति देहदान चैरिटेबल ट्रस्ट, खुशाल चन्द्र साहू ने बताया यह विवाह संविधान की मूल भावना से प्रेरित है। हमारा उद्देश्य सामाजिक जागरूकता फैलाना और संविधान मूल्यों को घर-घर तक पहुंचाना है।

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