Pooja Tomar: भारत की स्टार मिक्स्ड मार्शल आर्ट (एमएमए) फाइटर पूजा तोमर ने कहा है कि उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर जुनून और मेहनत हो तो छोटे गांव से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंच यूएफसी (अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप) तक पहुंचा जा सकता है।
हाल ही में मकाऊ में हुई यूएफसी फाइट में चीन की शी मिंग से भिड़ने वाली पूजा ने ने अपने करियर, परिवार, प्रेरणाओं और आगामी मुकाबले पर बात की।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे के आने वाली पूजा ने कहा कि यूएफसी में जीत दर्ज करने वाली पहली भारतीय महिला बनने के बाद उनके ऊपर जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और आत्मरक्षा सीखने पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर लड़की को मार्शल आर्ट्स सीखना चाहिए ताकि वह आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा कर सके। छोटे गांव से निकलकर यूएफसी तक पहुंचने के अपने सफर को याद करते हुए पूजा ने कहा कि यदि वह ऐसा कर सकती हैं तो देश की अन्य लड़कियां भी यह कर सकती हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि समाज या परिस्थितियों को बहाना न बनाएं और अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करें।
मां को बताया अपनी ताकत
अपने निजी जीवन के बारे में बताते हुए पूजा ने कहा कि खाली समय में उन्हें ड्राइंग करना, तैराकी करना और लोगों से मिलना पसंद है। उन्होंने अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा और समर्थन बताया। पूजा ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में तमाम सामाजिक दबावों और तानों के बावजूद उनकी मां ने हमेशा उनका साथ दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
भारत से निकल सकते हैं यूएफसी चैंपियन
भारत में एमएमए के भविष्य पर बात करते हुए पूजा ने कहा कि देश में अभी भी विश्वस्तरीय सुविधाओं और प्रशिक्षकों की कमी है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय फाइटर्स लगातार प्रगति कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि बेहतर सुविधाएं मिलने पर भारत से कई यूएफसी चैंपियन निकल सकते हैं। अपनी पहली यूएफसी जीत को याद करते हुए पूजा ने कहा कि वह पल उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण था। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य भारतीय एमएमए को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और देश का नाम वैश्विक मंच पर रोशन करना है।


