भविष्य में सड़कों पर LPG टैंकरों का बड़ा ट्रांसपोर्ट खत्म करने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठा रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने अब रिफाइनरियों, आयात टर्मिनलों और LPG बॉटलिंग प्लांटों को आपस में जोड़ने के लिए नई पाइपलाइनों बनाने का काम शुरू कर दिया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि ये नई पाइपलाइनें देश के मुख्य LPG सप्लाई स्रोतों को बॉटलिंग प्लांटों से जोड़ेंगी। इससे पूरे इलाकों में LPG की सप्लाई बिना किसी रुकावट के आसानी से हो सकेगी। ये पाइपलाइनें जरूरत पड़ने पर स्टोरेज का भी काम करेंगी और देश में LPG की सप्लाई सुरक्षा को मजबूत बनाएंगी।
कुल मिलाकर नौ LPG पाइपलाइन परियोजनाओं की योजना बनाई गई है। अभी चार पाइपलाइनों के लिए बोली की प्रक्रिया चल रही है।
ये चार पाइपलाइनें
- चेरलापल्ली से नागपुर
- शिकरापुर से हूबली-गोवा
- पारादीप से रायपुर
- झांसी से सितारगंज
पाइपलाइनों की कुल लंबाई करीब 2,500 किलोमीटर
इन सभी नई पाइपलाइनों की कुल लंबाई करीब 2,500 किलोमीटर होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 12,500 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।फिलहाल भारत में LPG पाइपलाइनों का नेटवर्क सिर्फ 8,000 किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा है।
नई योजना से यह नेटवर्क काफी बड़ा हो जाएगा।इस बदलाव से सड़कों पर LPG टैंकरों की आवाजाही कम होगी, जिससे दुर्घटना का खतरा घटेगा। पाइपलाइन से LPG भेजना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका है। PNGRB के अनुसार, इस परियोजना से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी काफी कम होगा।
टैंकरों की जगह पाइपलाइन से LPG ले जाने से समय बचेगा, नुकसान कम होगा, सुरक्षा बढ़ेगी और लागत भी घटेगी। इससे भारत के जलवायु लक्ष्यों को भी मदद मिलेगी।यह कदम LPG की सप्लाई को ज्यादा विश्वसनीय, सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।


