मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध अब शांत हो गया है। ईरान ने बड़ा ऐलान किया है कि युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहेगा और तेल की सप्लाई पर कोई रोक नहीं लगेगी।लेकिन मार्च के महीने में, जब युद्ध अपने चरम पर था, भारत में पेट्रोल और डीजल को लेकर अजीब स्थिति बन गई थी।
लोग डर गए थे कि कहीं तेल की सप्लाई रुक न जाए। कई शहरों के पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं। लोग अपनी गाड़ियों में पूरा टैंक भरवा रहे थे, कुछ लोग तो अतिरिक्त डिब्बों में भी ईंधन भरकर रख रहे थे। पेट्रोल पंप वाले कर्मचारी भी इतनी भीड़ पहले कभी नहीं देखे थे।सरकारी आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं।
बढ़ोतरी आम जरूरत से ज्यादा
पेट्रोलियम मंत्रालय के PPAC के अनुसार, मार्च में डीजल की खपत काफी बढ़ गई। फरवरी में जहां डीजल की खपत 7.66 मिलियन टन थी, मार्च में वो बढ़कर 8.72 मिलियन टन हो गई। पेट्रोल की खपत भी बढ़कर 3.77 मिलियन टन पहुंच गई, जो कई महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।यह वृद्धि सामान्य नहीं थी। यह ठीक उसी समय हुई जब ईरान से जुड़े युद्ध के तनाव बढ़ रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी आम जरूरत से ज्यादा थी और ज्यादातर लोगों ने भविष्य की चिंता में स्टॉक करने के लिए ईंधन खरीदा था। हालांकि LPG (रसोई गैस) की कहानी अलग रही। सिलेंडर बुकिंग करने वालों की लंबी कतारें लग रही थीं, लेकिन मार्च में कुल LPG की खपत घटकर 23 लाख टन रह गई। इसके पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं।
पहला, व्यावसायिक LPG (रेस्तरां, ढाबे, होटल) की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं, जिससे कई जगहों पर खाना बनाना महंगा पड़ रहा था और कुछ ने खपत कम कर दी या अस्थायी रूप से बंद कर दिया। दूसरा, आम परिवारों ने भी महंगाई के डर से गैस का इस्तेमाल संभलकर किया।
गूगल ट्रेंड्स में साफ दिखी घबराहट
गूगल ट्रेंड्स के आंकड़े भी लोगों की इस घबराहट को साफ दिखाते हैं। मार्च के अंत में पेट्रोल की खोज बहुत तेजी से बढ़ी। LPG की खोज मार्च के बीच में बढ़ी लेकिन जल्दी ही कम हो गई। उसी समय इंडक्शन गैस या इंडक्शन कुकर की खोज भी बढ़ गई, क्योंकि लोग गैस न मिलने की स्थिति में खाना बनाने का दूसरा तरीका ढूंढ रहे थे।यह चिंता पूरे भारत में बराबर नहीं थी।
राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में LPG और पेट्रोल से जुड़ी खोजें सबसे ज्यादा थी। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में इस तरह की घबराहट अपेक्षाकृत कम देखी गई। अब जब युद्धविराम हो गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहने वाला है, तो भारत में ईंधन की सप्लाई पर लगी यह चिंता भी धीरे-धीरे कम होनी चाहिए।


