आने वाला पखवारा कुशीनगर जनपद के जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने वाला होगा। मौसम विभाग का मानना है कि धीरे-धीरे सूरज की किरणें असह्य होती जाएंगी, तपिश बढ़ेगी और अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है।
तापमान में औसतन 6-8 डिग्री सेल्सियस की उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसका जनजीवन पर व्यापक असर पड़ेगा। गन्ने के साथ मूंग व उड़द की खेती प्रभावित होगी। मौसम शुष्क बना रहने से खेतों की नमी तेजी से सूखेगी जो किसानों के सामने संकट खड़ा कर सकती है।
बुधवार को न्यूनतम 22 व अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा। विभाग का मानना है कि यह स्थिति जनपद में आगामी पांच दिनों तक रहेगी। अगले सप्ताह में भी मौसम शुष्क रहने की संभावना है, वर्षा के आसार नहीं दिख रहे हैं। आर्द्रता में वृद्धि एवं हवा की गति सामान्य (1-16 किमी/घंटा) रहने का अनुमान है। उच्च तापमान के कारण लू जैसे हालात बने रहने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में बचाव पर ध्यान देने की जरूरत है। मौसम की चेतावनी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। जनपद में लगभग 45 हजार हेक्टेयर में बसंतकालीन गन्ने की बोआई हुई है। खेतों की नमी सूखने से अंकुरण प्रभावित होगा। अगर पौधे निकल भी जाएंगे तो नमी के अभाव में सूख जाएंगे। मूंग व उड़द के पौधों की बढ़वार ठहर जाएगी, फलियां नहीं निकलेंगी।
किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह
उच्च तापमान को देखते हुए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। मौसम विज्ञानी श्रुति वी सिंह ने बताया कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की स्थिति में फसलों में हल्की एवं बार-बार सिंचाई की जाए। सब्जियों, दलहनी एवं बागवानी पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसान मल्चिंग (फसल अवशेष/प्लास्टिक आवरण) का प्रयोग कर मिट्टी की नमी को संरक्षित रखें और तापमान के प्रभाव को कम करें।
दोपहर (12-3 बजे) के समय सिंचाई, छिड़काव एवं रासायनिक दवाओं का प्रयोग न किया जाए। फूल एवं फल गिरने से बचाव के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव सुबह व शाम को करें। खेतों में खरपतवार की निराई करें, इससे नमी का अनावश्यक नुकसान नहीं होगा।
पशुपालक व मत्स्य पालक भी रहे सतर्क
जिला कृषि अधिकारी डा. मेनका ने कहा कि पारा चढ़ने के साथ ही प्रचंड गर्मी भी पड़ेगी। इस स्थिति में पशुओं की सेहत खराब हो सकती है। उनके रहने वाले स्थान पर पर्याप्त छाया रहे। उन्हें बार-बार ठंडा पानी पिलाया जाए और स्नान कराया जाए। इससे उन्हें गर्मी से राहत मिलेगी। मस्त्य पालकों को तालाब-पोखरों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था करनी होगी।
पोल्ट्री संचालक बचाव का करें प्रबंध
विशेषज्ञों ने पोल्ट्री संचालकों को सलाह दी है कि मुर्गा-मुर्गी व चूजों को गर्मी से बचाने का प्रबंध करें। तापमान बढ़ने पर जूट के बोरों को पानी में भिगो कर पोल्ट्री फार्म की खिड़कियों पर टांग दें। शेड के भीतर फैन की व्यवस्था करनी पड़ेगी। बर्तनों में रखे गए पानी को दिन में कई बार बदलना पड़ेगा। क्याेंकि गरम पानी पीने से चूजों की सेहत बिगड़ सकी है।


