‘उत्पाद सिपाही परीक्षा में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ठेका’, भाजपा ने पिछले 3 साल की सभी परीक्षाओं की CBI जांच मांगी

 उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में भाजपा ने आरोपितों को बचाने का सरकार पर आरोप लगाया है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में इस मुद्दे पर विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने संयुक्त प्रेस वार्ता की।

मुख्य सचेतक सह हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि 12 अप्रैल को हुई उत्पाद सिपाही परीक्षा में पेपर लीक की घटना कोई पहली घटना नहीं है। झामुमो, कांग्रेस और राजद की सरकार में जितने भी एग्जाम हुए हैं, लगभग सभी परीक्षा विवादों में रहा है।

उन्होंने पिछले तीन सालों में हुई सभी परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग सरकार से की। जायसवाल ने कहा कि 12 अप्रैल को उत्पाद सिपाही की बहाली को लेकर लिखित परीक्षा के एक दिन पहले 179 बच्चे तमाड़ में गिरफ्तार हुए।

उनके साथ अतुल वत्स जो इंटरनेशनल गिरोह का सरगना है वह भी गिरफ्तार हुआ। सरकार के दबाव में प्रशासन द्वारा कहा गया कि यह पेपर लीक नहीं है। जबकि तमाड़ थाना प्रभारी ही कह रहे हैं कि जहां पर प्रश्न पत्र प्रिंट होता है वहीं से चुरा करके बच्चों के बीच बांटा गया और उनको रटवाया गया।

सरकार स्पष्ट करे कि परीक्षा संचालन के लिए किस एजेंसी को इन्होंने निबंधित किया था। सूचना है कि बिहार में यह ब्लैकलिस्टेड कंपनी है, जिसके ऊपर मामला भी दर्ज है। प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि पिछले 3 वर्षों में हुई सभी परीक्षाओं में विवाद हुआ है।

मंडल ने कहा कि जेएसएससी उत्पाद परीक्षा लेने वाली एजेंसी कौन है, सरकार को यह बताना चाहिए। मंडल ने कहा कि एक और दिलचस्प बात कि उत्पाद सिपाही परीक्षा मामले में पुलिस ही सूचक है और पुलिस ही गवाह भी।

हाई कोर्ट ने भी पुलिस के इस रवैये पर फटकार लगाई है। इस मामले में कहीं ना कहीं पुलिस और राज्य सरकार सच को छुपाना चाहती है। सिपाही परीक्षा मामले में व्यापक पैमाने पर सीटों का बंदरबांट हुआ है। राज्य सरकार अगर पार्टी की मांगों पर विचार नहीं करती है तो सड़क से सदन तक आंदोलन किया जायेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *