महायोजना 2031 देवरिया में सड़कों के निर्माण समेत अन्य नगरीय सुविधाओं के लिए बड़े स्तर पर भू-उपयोग प्रस्तावित किए गए हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से पहल नहीं होने के कारण प्रस्ताव शासन को नहीं भेजे जा रहे हैं। इससे शहर के सुनियोजित व नियंत्रित विकास की रफ्तार थम गई है।
महायोजना के तहत सोनूघाट से रुद्रपुर मार्ग होते हुए गोरखपुर को जोड़ने वाला 60 मीटर चौड़ा बाईपास व नहर किनारे 24 मीटर चौड़ा कैनाल मार्ग प्रस्तावित है। इसके अलावा शहर के भीतर 30 मीटर चौड़ी सड़क होने पर ही लेआउट स्वीकृति का प्रविधान नई उपविधि में किया गया है।
बावजूद इसके, प्रस्तावों पर अमल न होने से न तो सड़कों का निर्माण शुरू हो पा रहा है और न ही भवन मानचित्रों को स्वीकृति मिल रही है। इससे शहर में बसने का सपना देख रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर व आसपास के क्षेत्रों में सुनियोजित विकास के लिए कुल 4558 हेक्टेयर भूमि विभिन्न भू-उपयोग के तहत प्रस्तावित है, इसमें 2039.61 हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र के लिए निर्धारित है।
औद्योगिक विकास भी ठप
महायोजना में औद्योगिक विकास के लिए 305.22 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जिसमें वृहद उद्योग के लिए 37.20, मध्यम उद्योग के लिए 25.98 और लघु उद्योग के लिए 242.04 हेक्टेयर भूमि शामिल है। बावजूद इसके उद्योग विभाग की ओर से अब तक कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है।
ट्रांसपोर्ट नगर के लिए भूमि प्रस्तावित
गोरखपुर रोड, सलेमपुर रोड व कसया रोड पर एक-एक अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट नगर के लिए कुल 36.56 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है, लेकिन यह योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भी पहल नहीं
कुर्ना नाला के समीप 26.05 हेक्टेयर भूमि पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। नगर पालिका परिषद इस भूमि को खरीदकर प्लांट स्थापित कर सकती है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
हरित क्षेत्र, पार्क व खुले स्थान के लिए भी भू-उपयोग निर्धारित
महायोजना में हरियाली बनाए रखने के लिए 275.90 हेक्टेयर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित है। खेल मैदान व स्टेडियम के लिए 98.14 हेक्टेयर तथा पार्क व खुले स्थान के लिए 446.88 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है।
परसिया अहिर, अगस्तपार, अमेठी, अवरा चौरी, बभनी, बड़हरा, बांस देवरिया, भरौली बाजार, भीमपुर, चकिया, चकरामचंदर, दानोपुर, देवरिया खास समेत अन्य जगहों पर हरित क्षेत्र व पार्क के लिए आरक्षित होने के कारण लोग अपनी जमीन बेच नहीं पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


