कभी यमुना के किनारे बसे धूल भरे 36 गांवों की एक शांत बस्ती, आज गगनचुंबी इमारतों और एक्सप्रेसवे की वह चमकती दुनिया है जिसे हम ‘नोएडा’ कहते हैं। 17 अप्रैल 1976 को जब ‘न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (नोएडा) की नींव रखी गई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह ऊसर जमीन एक दिन उत्तर प्रदेश का ‘आर्थिक पावरहाउस’ बन जाएगी।
आज अपनी स्थापना के 50वें वर्ष (स्वर्ण जयंती) में नोएडा केवल एक शहर नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की प्रगति का एक जीवंत दस्तावेज है। एक पौधा, जो इस समय दरख्त (वृक्ष) के रूप में आसमान की ऊंचाइयों को छूने के साथ अपने साये में लाखों लोगों को आश्रय दे रहा है, रोजगार दे रहा है… साथ ही विकास के नए आयाम और नई इबारतें भी लिख रहा है। तो, आइए सबरंग के इस अंक में आज अपने पाठकों को नोएडा के इसी मान… अभिमान की स्वर्णिम यात्रा में विकास के 40 माइलस्टोन और इसे आकार देने वाली 10 प्रबुद्ध हस्तियों से रूबरू कराते हैं-
1-प्रदेश को एक्सप्रेसवे देने वाला पहला शहर
उत्तर प्रदेश को पहला एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे देने का श्रेय नोएडा को ही है। नोएडा से आगरा तक 189 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेसवे बना। 2012 में इसे आमजन के लिए खोला गया। इसके शुरू होने से दिल्ली से मथुरा व आगरा की यात्रा बेहद आसान हो चुकी है। इसी एक्सप्रेसवे के जरिये आज लखनऊ, मध्य प्रदेश, राजस्थान आना-जाना सुविधाजनक हो गया है।
2-नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे
यातायात में बगैर फंसे शहर होता है पार। यह एक्सप्रेसवे ग्रेटर नोएडा को सीधे दिल्ली से जोड़ता है। इसी के जरिये दिल्ली के लोग यमुना एक्सप्रेस-वे से होते हुए सीधे आगरा व लखनऊ से होते हुए उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर से जुड़ जाते हैं।
3-डीएनडी फ्लाईवे
यह फ्लाईवे नोएडा को दिल्ली से जोड़ता है। इससे नोएडा के लोगों को राष्ट्रीय राजधानी के एम्स व आइएलबीएस जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ ही, आईआईटी व आईजीआई एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मिलती है।
4-एफएनजी एक्सप्रेसवे
यह फरीदाबाद से नोएडा होते हुए गाजियाबाद से जुड़ता है। नोएडा में इसका नौ किलोमीटर का हिस्सा बना हुआ है, जिससे यातायात सुगम रहता है। फिलहाल फरीदाबाद और गाजियाबाद में यह अभी पूरा नहीं हो सका है। यह पूरा हो जाएगा तो उत्तर प्रदेश और हरियाणा को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मार्ग बन जाएगा।
5-एलिवेटेड रोड
आंतरिक रोड पर जाम की समस्या को खत्म करने के लिए दो एलिवेटेड रोड (सेक्टर 60 से सेक्टर 28 तक व सेक्टर-40 से सेक्टर 83 तक) पर वाहन दौड़ने लगे हैं। इसके साथ ही सेक्टर-14ए से लगती दिल्ली सीमा पर चिल्ला एलिवेटेड रोड का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है, इससे दलित प्रेरणा स्थल के सामने लगने वाले जाम से निजात मिलेगी।
6-ओखला बैराज से यमुना एक्सप्रेसवे तक एलिवेटेड कॉरिडोर
यह प्रस्तावित 30 किलोमीटर लंबा कारिडोर कालिंदी कुंज बार्डर के पास ओखला बैराज से यमुना के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के समानांतर यमुना एक्सप्रेस-वे तक जाएगा, जो आगे दिल्ली से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को सुगम बनाएगा।
मेट्रो
7-ब्लू लाइन मेट्रो
वर्ष 2009 में दिल्ली से नोएडा सिटी सेंटर तक मेट्रो सेवा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद इसे 2019 में इसे सेक्टर 63 में इलेक्ट्रानिक सिटी तक बढ़ाया गया। मैजेंटा लाइन मेट्रो, इस लाइन से नोएडा के लोगों को बोटैनिकल गार्डन से आइजीआइ एयरपोर्ट से आगे तक की कनेक्टिविटी मिलती है। इस स्टेशन पर मैजेंटा लाइन और ब्लू लाइन जुड़ी हुई हैं।
एक्वा लाइन मेट्रो
यह मेट्रो लाइन नोएडा सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा में परी चौक को जोड़ते हुए ग्रेटर नोएडा के डिपो मेट्रो स्टेशन तक चल रही है, जिसे बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक बढ़ाने का प्रस्ताव का निर्माण कार्य चल रहा है।
8-रैपिड रेल का प्रस्ताव
गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की राह आसान करेगी रैपिड रेल। मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी में रैपिड रेल शहर की जीवन रेखा बनेगी। गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक 73 किमी लंबा रैपिड रेल कारिडोर बनेगा, जो हवाई यात्रियों के साथ ही शहर के लाखों लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
9-दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
नोएडा हाई स्पीड रेल के मानचित्र पर भी अंकित होगा। दिल्ली से वाराणसी के लिए हाई स्पीड रेल कारिडोर का उत्तर प्रदेश का पहला स्टेशन नोएडा के सेक्टर 148 में बनेगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दिल्ली की दूरी 21 मिनट में तय होगी, जबकि दिल्ली से मथुरा यात्री 35 मिनट में पहुंच सकेंगे।
10-पूर्वी भारत की ट्रेनों का अड्डा बनेगा ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को रेलवे टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। रेल मंत्रालय की विशेष परियोजना में शामिल इस बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को ग्रेटर नोएडा स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। 13 प्लेटफार्म यहां बनाए जाएंगे। भारत के पूर्वी राज्यों को जाने वाली 70 से अधिक ट्रेनें यहां से चलेंगी।
11-डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग जगत को सहूलियत देने के लिए ईस्ट और वेस्ट फ्रेट कारिडोर का केंद्रीय स्टेशन बोड़ाकी स्टेशन को बनाया गया है। बोड़ाकी में दोनों फ्रेट कारिडोर जुड़ते हैं, जिससे यह नोएडा व पश्चिम उत्तर प्रदेश के उद्यमियों के लिए भी बहुत लाभदायक है।
12-देश में माल ढुलाई में तेजी लाएगा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब
देशभर में माल ढुलाई में तेजी लाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा देश का पहला मल्टी मोडल लाजिस्टिक हब। 8,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली यह परियोजना 800 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी और इसमें कंटेनर टर्मिनल, वेयरहाउसिंग काम्प्लेक्स और मल्टीमोडल परिवहन सेवा शामिल होंगी।
इसे दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कारिडोर के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दिल्ली सहित एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लाजिस्टिक्स क्षमता में सुधार माल ढुलाई के समय में कमी लाना है।
13-मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब में मेट्रो, रेल और बस सेवा
ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहा मल्टी मोडल ट्रांसपोर्ट हब एक ऐसा एकीकृत केंद्र है, जो रेल, मेट्रो, बस, और व्यक्तिगत वाहनों को एक ही स्थान पर जोड़ता है। यह यात्रियों के लिए निर्बाध, तेज और आरामदायक आवागमन सुनिश्चित करेगा। यहां बस टर्मिनस, मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशन एक-दूसरे से जुड़ेंगे। अलग-अलग परिवहन साधनों को आसानी से बदलने की सुविधा मिलेगी।
14-नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
नोएडा को दुनिया के वायु मार्ग के नक्शे पर लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद, यह भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने की राह पर है। पहले ही चरण में यहां सालाना एक करोड़ से अधिक यात्री क्षमता होगी। नेट जीरो उत्सर्जन वाले इस एयरपोर्ट से पूरे पश्चिमी उप्र को विशेष लाभ होगा।
खेल
15-देश में पहली फार्मूला वन रेस और मोटो जीपी
यहां के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में फार्मूला वन रेस 2011, 2012 और 2013 में आयोजित की गई। वहीं, मोटो जीपी की पहली रेस 22-24 सितंबर 2023 को आयोजित की गई।
16-क्रिकेट
क्रिकेट में भी जिले ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ग्रेटर नोएडा का शहीद विजय सिंह पथिक स्टेडियम का मैदान आइसीसी का 48वां मान्यता प्राप्त मैदान है। इसी मैदान पर पहली बार बीसीसीआइ ने दलीप ट्राफी का पहला पिंक बाल मैच 23 अगस्त 2016 को खेला गया। अफगानिस्तान क्रिकेट का होम ग्राउंड भी यह मैदान काफी लंबे समय तक रहा।
17-ओलिंपिक की तैयारी
दुनिया में खेलों का सबसे बड़ा महाकुंभ ओलिंपिक की मेजबानी भी नोएडा के हिस्से में आ सकती है। यमुना प्राधिकरण ने महाकुंभ के आयोजन के लिए इन्फ्रा विकसित करने को ओलिंपिक विलेज के लिए दो स्टेडियम आरक्षित कर दिए हैं, जहां स्टेडियम और खेल गांव विकसित होगा।
शिक्षा
18-सबसे अधिक प्राइवेट यूनिवर्सिटी
प्रदेश का ऐसा शहर जहां सबसे अधिक प्राइवेट कालेज और विश्वविद्यालय हैं। शहर में 150 से अधिक कालेज और करीब 10 प्राइवेट विश्वविद्यालय बने हुए हैं। इन कालेज और विश्वविद्यालयों में करीब 20 देशों के बच्चे यहां पर पढ़ाई कर रहे हैं।
19-नॉलेज पार्क में खिल रहा भविष्य
उत्तर प्रदेश में एकमात्र ऐसा शहर है, जहां पर नालेज पार्क है। शहर में पांच अलग-अलग नालेज पार्क स्थापित किए गए हैं। इन सभी स्थानों पर एजुकेशन हब बने हुए हैं। नोएडा में शिक्षा की पहचान जहां एमिटी विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों से है, वहीं ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया व शारदा जैसे बड़े शिक्षण संस्थान हैं। नए विकसित होने वाले न्यू नोएडा में यूनिवर्सिटी, मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग और स्किल सेंटर्स के लिए बड़ी भूमि प्रस्तावित की गई है, जो इस क्षेत्र को भी शिक्षा का हब बनाने में मददगार साबित होगी।
20-युवाओं की उड़ान में पंख लगाएगा एआई सेंटर
उत्तर प्रदेश का पहला एआइ सेंटर गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में तैयार हो रहा है। इसका शुभारंभ जुलाई-अगस्त में किया जा सकता है। छात्रों को शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों, प्रोजेक्ट्स तथा नवाचार की दिशा में एक नई उड़ान मिलेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। यह केंद्र छात्रों की कौशल क्षमता को बढ़ाने, रोजगार के नए अवसरों को सृजित करने के साथ भविष्य की चुनौतियों का भी समाधान देगा।
सेहत
21-चाइल्ड पीजीआई सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल
सेक्टर-30 में स्थित इस अस्पताल में बच्चों की हर बीमारी का इलाज। प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों से लोग बच्चों का इलाज कराने के लिए यहां आते हैं। चाइल्ड पीजीआइ में बच्चों की जन्मजात या जीन संबंधित बीमारियों की जांच करने और इलाज की सुविधा है। यहां पर बोन मैरो प्रत्यारोपण की क्षमता भी बढ़ाई गई है। यहां दुर्लभ बीमारियों का इलाज भी होता है।
22-सरकारी अस्पताल में प्रदेश का पहला इंक्यूबेशन सेंटर
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में प्रदेश का पहला इंक्यूबेशन सेंटर है। इससे उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न प्रदेशों के नवाचारों और स्टाटर्अप को क्लीनिकल ट्रायल के साथ ही विकसित करने में सहायता प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पहला बायरेक बायोनेस्ट सेंटर भी राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में स्थापित किया गया है। यह इसके माध्यम से जिम्स के इंक्यूबेशन सेंटर में इंक्यूबेट किए गए नवाचार और स्टार्टअप को फंडिंग दिलाने में मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा उन्हें पेटेंट से लेकर हर तरह की सुविधा मिलने में आसानी हो रही है।
23-मेडिकल डिवाइस पार्क से मेक इन इंडिया हुआ मजबूत
केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया अभियान में नोएडा अहम भूमिका निभा रहा है। कोविड का सामना कर चुकी दुनिया समझ चुकी है कि हेल्था इन्फ्रा को मजबूत करना बेहद जरूरी है। हेल्थ सेक्टर में मेक इन इंडिया ब्रांड को मजबूत कर रही केंद्र सरकार ने मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए भी नोएडा को ही चुना है। यीडा क्षेत्र में प्रदेश का पहला मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है। इसमें इलेक्ट्रानिक्स आधारित चिकित्सा उपकरण बनेंगे, जो देश के साथ विदेश में भी मरीजों के उपचार में काम आएंगे।
आर्थिकी का इंजन : उद्योग
24-एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के केंद्र सरकार के लक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार भी एक ट्रिलियन लक्ष्य के साथ कदमताल कर रही है। प्रदेश सरकार के इस लक्ष्य का ग्रोथ इंजन नोएडा ही है। यहां विकसित हो रही एआइ सिटी, सेमीकंडक्टर चिप फैक्ट्री, इलेक्ट्रानिक हब, डाटा सेंटर में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है।
25-गौतमबुद्ध नगर सरकारी खजाना भरने में प्रदेश भर में अव्वल
गौतमबुद्ध नगर जीएसटी वसूली में हमेशा लगातार ऊंची छलांग लगाई है। पांच वर्षों से लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर काबिज है। 2025-26 वित्त वर्ष में 25991.08 लाख रुपये की जीएसटी वसूली की। इस अभूतपूर्व वृद्धि से जहां सरकारी खजाने को मजबूती मिली, वहीं औद्योगिक प्रगति, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और कुशल प्रशासनिक प्रयासों ने यह उपलब्धि हासिल की।
26-गारमेंट्स हब से फैशन उद्योग तक
आप जानते हैं, नोएडा ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना के तहत यहां पांच हजार से अधिक गारमेंट्स उद्योग यहां संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, 150 से अधिक फैशन उद्योग भी इस शहर की पहचान बढ़ाते हैं। नोएडा के होजरी काम्प्लेक्स से लेकर यमुना के एपैरल पार्क तक रेडिमेड गारमेंट की हजारों इकाइयां हैं, जो दुनियाभर के नामचीन ब्रांड के लिए कपड़े तैयार कर विदेशी बाजार तक मेड इन इंडिया को मजबूत कर रही हैं।
27-एकमात्र जिला जहां पांच औद्योगिक प्राधिकरण
नोएडा-ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां पांच औद्योगिक विकास प्राधिकरण हैं। यहां नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, यमुना प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण और इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (आइआइटीजीएनएल) है। यमुना प्राधिकरण के अंतर्गत गौतमबुद्ध नगर, मथुरा, हाथरस और आगरा तक का क्षेत्र आता है।
28-औद्योगिक पार्कों ने खोला रोजगार का पिटारा
बेरोजगारों को रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती है। औद्योगिक पार्कों से प्रदेश सरकार ने रोजगार का हब बना दिया है। यीडा में बन रहे एपैरल, टाय, मेडिकल डिवाइस पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क व एमएसएमई पार्क लाखों लोगों के लिए रोजगार पैदा करने जा रहे हैं। औद्योगिक पार्कों ने रोजगार का पिटारा खोल दिया है।
29-औद्योगिक आइटी हब तक नोएडा का सफर
नोएडा औद्योगिक नगरी है। यहां सबसे अधिक उद्योग संचालित हो रहे हैं। लेकिन, अब आइटी हब के रूप में भी नोएडा की पहचान बन चुकी है। देश-विदेश की बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां संचालित हैं। यह कंपनियां हजारों लोगों को रोजगार दे रहीं हैं।
30-एआई सिटी और सेमीकंडक्टर चिप के साथ आधुनिक तकनीक का चेहरा
दुनिया में तकनीकी विकास तेजी से हो रहा है। एआई हर क्षेत्र में अपनी पैठ बना चुका है। नई तकनीक को अपनाने के लिए हर ओर होड़ मची हुई है। यीडा सिटी में एआइ सिटी और सेमीकंडक्टर चिप के निर्माण ने नोएडा की आइटी सिटी की पहचान को आधुनिक तकनीक के युग में प्रवेश दिलाया है।
31-लाइट कैमरा एक्शन की गूंजेगी आवाज
माया नगरी का आकर्षण हर किसी को खींचता है। उत्तर भारतीय राज्यों में हिंदी फिल्मों का सबसे बड़ा दर्शक वर्ग है। चाहे फिल्म दर्शक हों या फिर निर्माण या अभिनय में हाथ आजमाना हो, हर कोई मुंबई की ओर दौड़ता है, लेकिन मुंबई में गूंजने वाली लाइट कैमरा एक्शन की आवाज अब ग्रेटर नोएडा की फिल्म सिटी में भी गूंजेगी। जो रोजगार के साथ फिल्मी दुनियां के दीवानों का सपना है।
स्मार्ट सिटी
32-प्रदेश की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप
ग्रेटर नोएडा में स्थित इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कारिडोर की एक प्रमुख परियोजना है। इसे विश्वस्तरीय मानकों के साथ डिजाइन किया गया है। इसे एक टिकाऊ और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। इंडस्ट्री के साथ ही यहां आवासीय परियोजना भी विकसित की जा रही हैं। तीन बिल्डर परियोजना को मंजूरी भी मिल गई है।
33-कानून और सुरक्षा के हिसाब से शहर में काफी बदलाव हुआ है। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी की निगरानी है। डिजिटल सर्विलांस, स्मार्ट लाइटिंग, पार्क में वाईफाई जैसी सुविधा नोएडा का विश्वस्तरीय शहर बनाता है।
34-ऑनलाइन आवेदन से बिल्डिंग बनाने में आसानी
प्राधिकरण के डिजिटल प्लेटफार्म पर आनलाइन बिल्डिंग प्लान का अप्रूवल 30 दिनों के भीतर मिलता है। यह निर्माण विभाग को तेज और पारदर्शी बनाने वाली पहल है।
पार्क
35-राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थलः यह शहर का सबसे बड़ा और आकर्षक पिकनिक और वीकेंड स्पाट है। स्मारकों से इस स्थल की विशेष पहचान है। परिवार के साथ घूमने की पहली पसंद। स्थल को 107 करोड़ रुपये और खर्च कर अपग्रेड किया जाएगा।
36-एक तरफ बायोडायवर्सिटी पार्क…दूसरी ओर जंगल ट्रेल
75 एकड़ के नोएडा के सबसे बड़ा बायोडायवर्सिटी इको-पार्क में चार हजार से अधिक पेड़ हैं। जागिंग ट्रैक और वन्यजीव क्षेत्र विकसित करने की योजना है। यहां जल्द हिरन भी नजर आएंगे। आवासीय क्षेत्र के हजारों परिवारों को इससे स्वच्छ वातावरण मिल रहा है। दूसरी तरफ जंगल ट्रेल है जहां कबाड़ दहाड़ मारता है। 20 एकड़ का वेस्ट-टू-आर्ट इको पार्क कबाड़ से बनाया गया पार्क है, जो नए आकर्षक पिकनिक स्पाट के रूप में उभरकर सामने आया है।
37-बोटैनिकल गार्डन जहां, हैं दुर्लभ प्रजाति के पौधे
जब आप बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से गुजरते होंगे, तो अक्सर ये वनस्पति उद्यान ध्यान खींचता है। यहां पर सैकड़ों और दुर्लभ प्रजाति के पौधे मौजूद हैं। यहां पर लोग घरेलू गार्डन और पौधों को विकसित करने की जानकारी हासिल करने आते हैं। फ्लावर शो यहां की विशेष पहचान है। इसी तरह एक अनोखा वेद वन भी इस शहर की पहचान है। जहां ज्ञान और प्रकृति का संगम है। ट्रेल्स, स्कल्पचर और योग के लिए यह उपयुक्त स्थान है। चारों वेदों को यहां लेजर शो से प्रदर्शित किया जाता है। यह पहला थीम पार्क है। पक्षियों और प्रकृति प्रेम : ओखला बर्ड सेंचुरीः यहां 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां हैं और यहां नया वाकिंग और फोटोग्राफी जोन बनाया गया है। यमुना किनारे की यह जगह पक्षी ही नहीं, पर्यावरण प्रेमियों की भी पहली पसंद है।
38-शहीद स्मारक
सेक्टर 29 में बना बलिदानी स्मारक… जो देश के वीर सैनिकों के बलिदान का प्रतीक है। यह स्थान राष्ट्रभक्ति, एकता और वीर सैनिकों के प्रति सम्मान है। विजय दिवस जैसे विशेष अवसरों पर यहां पुष्पचक्र अर्पण समारोह आयोजित किए जाते हैं।
39-सुपरनोवा
सेक्टर-94 में बनी नोएडा की यह 65 मंजिला रिहायशी इमारत दिल्ली समेत एनसीआर की सबसे ऊंची इमारत है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका ‘स्पाइरा टावर’ है, जिसकी ऊंचाई लगभग 300 मीटर है। इसे 76 मंजिल तक बनाया जाना है।
40-माल्स एवं मल्टीप्लेक्स…और देर शाम की रौनक
आधुनिक जीवनशैली, विशाल माल और शानदार मल्टीप्लेक्स के लिए जाना जाता है। कभी नोएडा में वेव माल से शुरू हुआ माल और मल्टीप्लेक्स का कल्चर जीआइपी माल, भूटानी सिटी सेंटर माल, गौर माल के साथ ही डीएलएफ और गार्डन गैलेरिया तक पहुंच गया है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा ही नहीं, बल्कि दिल्ली समेत एनसीआर के अन्य शहरों के लोग भी अपना फेमिली टाइम बिताने व शापिंग करने आते हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की नाइटलाइफ अब दिल्ली, गुरुग्राम से कम नहीं है। जैसे ही सूरज ढलता है, ये दोनों शहर अपनी रोशनी और हाई बीट संगीत की दुनिया के साथ एक अलग ही रूप ले लेते हैं। यहां की नाइटलाइफ का रोमांच सेक्टर 18 के चमकते पब्स से लेकर ग्रेटर नोएडा के नए और हाई-प्रोफाइल क्लब्स तक है। सेक्टर 38 स्थित गार्डन गैलेरिया, इसे नोएडा का ‘पार्टी हब’ कहा जाता है। एक्सप्रेसवे पर स्थित एडवेंट सेक्टर 142, जिसे अब युवाओं की पहली पसंद माना जाने लगा है। यहां बिलकुल अलग शांत और क्लासी माहौल है। सेक्टर 104 और 144 में भी नए और बजट-फ्रेंडली पब्स देर रात तक गुलजार रहते हैं।
ये नाम…जो हैं नोएडा की शान
1-सुशील चंद्र त्रिपाठी, नोएडा प्राधिकरण के पहले सीईओ : इनके अनुसार पहले फेज-1 में पांच लाख की आबादी के अनुकूल इस शहर की परिकल्पना की गई थी।
2-अशोक चतुर्वेदी, चेयरमैन, यूफ्लेक्स : चार दशक पहले, बड़े उ द्योग के रूप में कंपनी को स्थापित किया, रोजगार के अवसर शुरू हुए।
3-अशोक के चौहान, संस्थापक, अध्यक्ष, एमिटी : तीन दशक पहले बनाई एमिटी यूनिवर्सिटी, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में जिले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
4-डॉ पुरुषोत्तम लाल, संस्थापक एवं चेयरमैन, मेट्रो ग्रुप आफ हास्पिटल्स : पद्मश्री के तीनों सम्मान से अलंकृत डा लाल को भारत में “इंटरवेंशनल कार्डियोलाजी का जनक कहा जाता है। भारत में 20 से अधिक नई हृदय उपचार प्रक्रियाओं की शुरुआत की है। दुनिया का पहला बिना सर्जरी वाला हार्ट होल क्लोजर और महाधमनी वाल्व रिप्लेसमेंट भी किया था।
5-महेश शर्मा, चेयरमैन, कैलाश अस्पताल : तीन बार से जिले के सांसद तो हैं ही, साथ ही जिले को चार दशक पहले स्वास्थ्य सरोकार दे
6-राम सुतार, मूर्तिकार : पद्मश्री से अलंकृत विश्व प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार थे, जो गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू आफ यूनिटी’ के मुख्य शिल्पकार के रूप में भी जाने जाते हैं। दशकों से इनका यहीं निवास रहा। -बीएल गौड़, चेयरमैन, गौड़संस :
7-डॉ. अजय त्यागी, संस्थापक, यथार्थ अस्पताल : यथार्थ अस्पताल के संस्थापक। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तीनों प्रमुख अस्पतालों में लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। आज कंपनी स्टाक एक्सचेंज में भी लिस्टेड है।
8-पीके गुप्ता, संस्थापक, शारदा अस्पताल : शारदा यूनिवर्सिटी व मेडिकल कालेज के संस्थापक। 1600 से अधिक बेड का सुपरस्पेशियलिटी शारदा अस्पताल भी बनाया। वर्तमान में शारदा यूनिवर्सिटी देश-विदेश के असंख्य छात्रों को शिक्षा दे रहा है।
9-बीएल गौड़, गौड़सन्स : नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा ग्रेटर व ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लोगों को 65 हजार से अधिक फ्लैट उपलब्ध कराए हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गौड़ सिटी टाउनशिप बनाई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को फ्लैट मिले।
10-मैत्रेयी पुष्पा, साहित्यकार : इफको साहित्य सम्मानित हिंदी साहित्य की एक प्रखर और बेबाक लेखिका हैं। उनके लेखन का मुख्य केंद्र ग्रामीण जीवन, स्त्री-संघर्ष और सामाजिक यथार्थ है।


