उत्तराखंड सूचना आयोग ने राज्य में आईएएस व आईएफएस अधिकारियों के भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों का पूरा ब्यौरा नहीं देने के कार्मिक विभाग के निर्णय का फिर से परीक्षण कर आख्या उपलब्ध कराने के आदेश पारित दिए हैं।
कार्मिक व वन विभाग की ओर से अधिकारियों के भ्रष्टाचार से संबंधितजानकारी को निजता का अधिकार बताते हुए देने से मना कर दिया जबकि जबकि गृह विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि पूर्व डीजीपी पीडी रतूड़ी, पूर्व एडीजी राकेश मित्तल, पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू पर भ्रष्टाचार से संबंधित कार्रवाई गतिमान है। आईएएस , आइपीएस अधिकारियों की हर साल जनवरी में आय, संपत्ति आय से संबंधित विवरण का परीक्षण के सवाल पर अभिलेख नहीं होने की जानकारी दी गई।
अब आयोग ने अगली तिथि पर सतर्कता विभाग के गठन, उद्देश्य एवं क्षेत्राधिकार के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए व्याख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान हल्द्वानी व चर्चित आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की ओर से मुख्य सचिव के लोक सूचना अधिकारी से नवंबर 2000 से अब तक राज्य के आईएएस , आइपीएस व आईएफएस अधिकारियों पर सतर्कता विभाग, सीबीआइ, ईडी की ओर से भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों के साथ ही उनकी अर्जित, बेनामी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देने, आईएएस , आइपीएस व आईएफएस अधिकारियों के स्थानांतरण, तैनाती का आधार बनी फाइल नोटिंग, सतर्कता स्थिति, डोमेन विशेषज्ञत, व्यक्तिगत विकल्प या अनुरोध से संबंधित प्रमाणित प्रतियां देने, सूचना मांगी गई थी, गृह विभाग की ओर से तीन पूर्व पुलिस अधिकारियों के नाम बताए गए हैं, जबकि कार्मिक व वन विभाग के लोक सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी की ओर से कहा गया कि ब्यौरा देने से अधिकारियों की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होगी, जिसके विरुद्ध संजीव ने सूचना आयोग में अपील दायर की थी।


