विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) से लागू हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में देर शाम अधिसूचना जारी कर दी, जबकि संसद में इसी कानून में संशोधन करके इसे 2029 में लागू करने पर बहस चल रही है।
इसमें महिलाओं की भागीदारी की बात कही गई है। प्रस्ताव है कि देश में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 किया जाएगा और इसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां भारत के मुकाबले संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी ज्यादा है। इन देशों में संसद के अंदर महिलाओं के नेतृत्व और समानता की स्थिति भारत से बहुत अलग है। हैरानी इस बात की है कि इनमें कई छोटे से देश शामिल हैं। आइए एक नजर डालते हैं…
दुनिया के इस देश में संसद में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा
रवांडा की संसद में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा है। PU (Inter-Parliamentary Union) की अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रवांडा में संसद के अंदर 63.8 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है और यह विश्व में सर्वोच्च है। इसके बाद क्यूबा का नाम आता है, जहां पर यह आंकड़ा 57.2 प्रतिशत है।
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अन्य प्रमुख देश
- न्यूजीलैंड- 49.2 %
- डेनमार्क- 48% (फरवरी 2026 चुनाव के बाद)
- आइसलैंड- 47.6%
- स्वीडन, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका- इन देशों में भी संसद में महिलाओं की भागीदारी 45% से ज्यादा है।
- इसके अलावा लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक (35.6%) है।
भारत की स्थिति
भारत में 18वीं लोकसभा में 74 महिला सांसद (14%) हैं, जो विश्व औसत से काफी कम है। अब महिला आरक्षण विधेयक के तहत इस भागीदारी को बढ़ाने की ओर कदम रख दिया गया है।


