झारखंड में फाइलों में कैद खेल विश्वविद्यालय, खिलाड़ियों को बाहर से लेनी पड़ रही शिक्षा

 झारखंड में खिलाड़ियों को खेल के लिए विश्व स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर मिला है। लेकिन जब खिलाड़ियों को खेल से संबंधित पढ़ाई करनी पड़ती है तो उनको दूसरे राज्य का सहारा लेना पड़ता है। वजह है झारखंड में खेल विश्वविद्यालय का समय पर न हीं खुलना।

झारखंड के खिलाड़ी लगभग नौ वर्षों से इंतजार कर रहे हैं कि शायद इस वर्ष ये विश्वविद्यालय रांची में खुल जाये और हमें खेल से संबंधित पढ़ाई के लिए दूसरे राज्य का रूख नहीं करना पड़े। लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

रांची से लगभग प्रत्येक वर्ष 50 से अधिक खिलाड़ी दूसरे राज्य में बीपीएड और एमपीएड की पढ़ाई करने जाते हैं। यहां खेल विश्वविद्यालय अभी तक फाइलों से बाहर ही नहीं निकला है।

वर्षों से है खिलाड़ियों को खेल विवि का इंतजार

झारखंड के हजारों खिलाड़ियों को खेल विश्वविद्यालय का इंतजार पिछले साल वर्षों से हैं। राज्य में 2011 में 34वें नेशनल गेम्स का आयोजन होटवार में हुआ था। वहां इंटरनेशनल क्वालिटी के नौ स्टेडियम और अन्य आधारभूत संरचनाएं तैयार की गयी थीं। इसके बाद इसके समुचित उपयोग के लिहाज से खेल विवि और खेल एकेडमी शुरू किये जाने की योजना सरकार के स्तर पर बनी।

इस दौरान 2015 में तत्कालीन रघुवर दास की सरकार के समय सीसीएल और राज्य सरकार के बीच एमओयू हुआ। इसके अनुसार 2018-19 में खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत होनी थी। साथ ही होटवार में स्पोर्ट्स एकेडमी का भी शुभारंभ होना था।

इस आधार पर जेएसएसपीएस ने 2016-2017 में एकेडमी का संचालन शुरू कर दिया। हालांकि शर्तों के हिसाब से दो साल के भीतर 15 खेलों में एकेडमी शुरू होनी थी। तीन वर्षों के भीतर खेल विवि भी शुरू करने की बात थी। इसमें 10 स्पोर्ट्स एकेडमी शुरू हो चुकी है, लेकिन खेल विवि अभी तक फाइलों में है।

खेलगांव के 10 एकड़ में बनना है खेल विवि

खेलगांव के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेल विवि बनाने के लिए 10 एकड़ जमीन चिन्हित किया गया था। इसके रख-रखाव और अन्य जिम्मेदारियों में सीसीएल की भागीदारी होगी. योग और फिजिकल एजुकेशन की शिक्षा दी जायेगी।

इस खेल विश्वविद्यालय में योग, फिजिकल एजुकेशन, व्यायाम क्रिया, विज्ञान व जीव यांत्रिकी, क्रीड़ा प्रबंधन कौशल एवं क्रीड़ा मनोविज्ञान, समाज विज्ञान, उन्नत क्रीड़ा प्रशिक्षण एवं तकनीकी आदि में उच्च शिक्षा दी जायेगी. विश्वविद्यालय में 50 फीसदी विद्यार्थी झारखंड के मूल निवासी होंगे. साथ ही फीस में उन्हें 25 प्रतिशत की छूट दी जायेगी।

खिलाड़ियों की परेशानी

केस स्टडी-1

ताइक्वांडो की राष्ट्रीय स्तर मेडलिस्ट खिलाड़ी नेहा कुमारी को चार साल पहले बीपीएड की पढ़ाई करनी थी। रांची में प्राइवेट यूनिवर्सिटी में ही बीपीएड (बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन) और एमपीएड की पढ़ाई होती है। जिसकी फीस बहुत अधिक होती है और सीटें भी कम होती है। इसके बाद नेहा ने महाराष्ट्र के अमरावती में इस कोर्स की जानकारी प्राप्त की।वहां फीस भी कम थी। जिसके बाद नेहा ने अमरावती से बीपीएड और एमपीएड किया।

केस स्टडी-2

राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी अनंत नाग चंदन की शुरुआत पढ़ाई रांची से हुई। लेकिन जब इन्हें खेल से संबंधित प्रोफेशनल पढ़ाई की जरूरत पड़ी तो प्राइवेट के अलावा कहीं कोई संस्थान नहीं दिखा। परेशान होकर इन्होंने भी महाराष्ट्र का रूख किया और दो साल की पढाई करके रांची वापस लौटे। अब ये एमपीएड (मास्टर इन फिजिकल एजुकेशन) की पढ़ाई करनी तो कहीं कोई विकल्प नहीं मिल रहा है।

बिहार में 2024 में शुरू हो गया खेल विवि

बिहार में झारखंड के बाद खेल विवि की योजना बनी और 29 अगस्त 2024 को राजगीर में खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत भी कर दी गयी। यहां नये सत्र की पढ़ाई भी शुरू है और खिलाड़ियों को पूरी सुविधा भी मुहैया करायी जाती है।

 

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