एक हाईस्कूल पास झोलाछाप ने यूट्यूब वीडियो देखकर नकली कफ सिरप तैयार करना शुरू किया और दो वर्षों तक लगातार इसकी सप्लाई करता रहा। हैरानी की बात यह है कि उसने नौ से दस हजार बोतलों की बिक्री कर डाली, लेकिन औषधि प्रशासन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
जानकारी के अनुसार, आरोपित अपने घर में ही कफ सिरप तैयार करता था और उसे तीन मेडिकल स्टोरों के साथ नशेड़ियों तक पहुंचाता था। स्थानीय मेडिकल स्टोरों पर भी उसके बनाए नकली सिरप खुलेआम बेचे जा रहे थे। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और लंबे समय तक मामले से अनजान बने रहे।
इतना ही नहीं, यह झोलाछाप पिछले 18 वर्षों से अवैध रूप से क्लीनिक भी चला रहा था। बावजूद इसके, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य और औषधि प्रशासन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण न केवल नकली दवाओं का कारोबार फल-फूल रहा है, बल्कि आम जनता की सेहत भी खतरे में पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक निगरानी की कमी और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।
यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यदि समय रहते कार्रवाई न की जाए तो नकली दवाओं का कारोबार कितनी बड़ी समस्या बन सकता है।


