तबादले के बाद भी नहीं हटीं बीडीओ, सवाल पूछने पर काट दिया फोन, डीएम ने बताई असल वजह

स्वच्छ भारत मिशन में कथित 67 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर बबेरू विकास खंड एक बार फिर सुर्खियों में है। 61 ग्राम पंचायतों वाले इस विकास खंड में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बीच तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) गरिमा अग्रवाल की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों और विभागीय जानकारी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कराए गए कार्यों में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले उजागर हुए हैं। इनमें लाखों रुपये के कथित गबन के प्रकरण भी शामिल हैं।

इसके बावजूद बीडीओ के तबादले और संबद्धीकरण के बाद भी उनके द्वारा नया पदभार ग्रहण न किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

मामले में मुरवल ग्राम पंचायत का प्रकरण भी चर्चा में है, जहां प्रयागराज से पहुंची आडिट टीम ने विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पकड़ी थीं। इसी तरह बबेरू ग्रामीण ग्राम पंचायत में करीब 37 लाख रुपये के गबन का मामला उप निदेशक पंचायत परवेज आलम खां की जांच में सामने आने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार, बबेरू विकास खंड में इससे पहले भी स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े कई मामलों में अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। फरवरी माह में ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय, लखनऊ से बीडीओ गरिमा अग्रवाल को मुख्यालय में संबद्ध किया गया था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने अब तक लखनऊ में कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

बताया जा रहा है कि निर्वाचन कार्य में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी होने के कारण वह बबेरू में ही कार्यरत रहीं, जिससे प्रशासनिक स्थिति जटिल बनी रही।

यह है पूरा मामला

बांदा शहर के जीआइसी फील्ड के सामने नमो गली निवासी लल्लू सिंह द्वारा बीडीओ के स्थानांतरण और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रेषित पत्र पर संज्ञान लिया गया था। इसके बाद 11 फरवरी 2026 को राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने उप मुख्यमंत्री ग्राम्य विकास एवं समग्र विकास को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बीडीओ को किसी दूरस्थ मंडल में स्थानांतरित करने की मांग उठाई गई थी।

18 फरवरी 2026 को गरिमा अग्रवाल को बबेरू से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध करते हुए ग्राम्य विकास आयुक्त लखनऊ से अटैच किया गया, लेकिन अब तक उनके द्वारा वहां पदभार ग्रहण नहीं किया गया है। वहीं 10 मार्च को जिलाधिकारी जे. रीभा द्वारा प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, लखनऊ को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया कि एसआइआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) प्रक्रिया के चलते बीडीओ को निर्वाचन कार्य की अनुमति के बिना कार्यमुक्त नहीं किया जा सका है, क्योंकि उन्हें बबेरू विधानसभा में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके कारण उनका कार्यमुक्तिकरण लंबित है। इधर अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन भी हो चुका है, लेकिन अब तक उनकी प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसी बीच स्वच्छ भारत मिशन में ग्राम पंचायत बबेरू ग्रामीण ग्राम पंचायत में 37 लाख रुपये के गबन पकडें जाने के बाद अनियमितताओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

मुरवल प्रकरण में प्रयागराज से आई टीम द्वारा जांच के दौरान विकास कार्यों में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद अभिलेख उपलब्ध न कराने की स्थिति भी सामने आई थी, जिसके आधार पर संबंधित सचिव अरविंद कुमार को निलंबित किए जाने की कार्रवाई हुई थी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि दोनों ग्राम पंचायतें बबेरू विकास खंड मुख्यालय से मात्र दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद खंड विकास अधिकारी द्वारा पर्यवेक्षण और निगरानी में कथित लापरवाही कैसे हुई। प्रयागराज की आडिट टीम और उप निदेशक पंचायत द्वारा पकड़े गए 37 लाख रुपये के गबन के बाद जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

फिलहाल, जांच की जिम्मेदारी परियोजना निदेशक राजेश यादव तथा लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अभय कुमार सिंह को सौंपी गई है। हालांकि दोनों अधिकारियों के जांच में शामिल होने से निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अब देखना यह होगा कि उच्च स्तर पर चल रही जांच में पूरे प्रकरण की सच्चाई कितनी स्पष्ट हो पाती है और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में क्या कार्रवाई होती है।

बीडीओ गरिमा अग्रवाल ने कहा कि ग्राम पंचायतों में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच चल रही है और जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी, वहीं नई तैनाती और पदभार ग्रहण को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने फोन काट दिया। डीएम जे रीभा ने बताया कि एसआइआर अभियान के कारण बीडीओ को कार्यमुक्त नहीं किया गया था।

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