निसिंग के एक फार्म हाउस में रविवार को घटी एक घटना ने इंसान और जानवर के रिश्ते को नई परिभाषा दे दी। नौ साल से परिवार का हिस्सा रही लैब्राडोर डॉग जिम्मी अपनी जान देकर मालिक की रक्षा कर गई।
कुरुक्षेत्र में आइवीएफ सेंटर चला रहे डॉ. सुमित ठाकुर ने बताया कि नौ साल पहले वह जिम्मी और मैक्स को करनाल से लाए थे। दोनों को बच्चों की तरह पाला गया। गर्मियों में एसी और कूलर, जबकि सर्दियों में हीटर की व्यवस्था रहती थी। परिवार के तीनों बच्चों का दोनों लैब्राडोर डॉग से गहरा लगाव था भावुक होकर वह कहते हैं कि हम किसी पर विश्वास करें या न करें, लेकिन कुत्ते जैसी वफादारी कहीं नहीं मिलती।
रविवार शाम वह अपने दोनों पालतू लैब्राडोर डॉग जिम्मी और मैक्स को लेकर बाहर जाने लगे। उसी दौरान गेट से एक ब्लैक कोबरा अंदर घुस आया। वह कुछ समझ आता, इससे पहले जिम्मी आगे होकर सीधे सांप पर टूट पड़ी।
कोबरा और जिम्मी के बीच करीब 25 सेकंड तक संघर्ष चला। मैक्स भी सांप के आसपास घूमकर उसे आगे बढ़ने से रोकता रहा।
लड़ाई के दौरान कोबरा ने जिम्मी के मुंह और अगले पंजे पर कई बार डंक मारा, लेकिन उसने अपना मोर्चा नहीं छोड़ा। उसने अपनी जान देकर मेरा जीवन बचा लिया। स्नेकमैन सतीश ने आकर दीवार के पास से कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। पशु चिकित्सक भी पहुंचे, लेकिन जिम्मी को बचाया नहीं जा सका।


