भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सोमवार की सुबह निधन हो गया। वह सौ वर्ष के थे। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। घाघरा नदी के महादेवा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि भतीजे जियालाल वर्मा ने दी।
जैतपुर के शेखूपुर गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मराज वर्मा सादा जीवन और उच्च विचार के प्रतीक रहे। देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई थी और इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
देश की आजादी के बाद भी उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वह आजीवन अविवाहित रहे। भतीजे अमरनाथ वर्मा के साथ रहते थे। वह काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार की सुबह उनका निधन हो गया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के निधन पर प्रशासन ने उन्हें राजकीय सम्मान दिया। उनके आवास पर गार्ड आफ आनर दिया गया। तहसीलदार निखिलेश कुमार, कोतवाली प्रभारी अजय प्रताप समेत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। पूर्व एमएलसी अजय कुमार वर्मा उर्फ विशाल वर्मा ने कहा कि हमने एक सच्चे देशभक्त और समाजसेवी को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है।


