अखिलेश यादव ने चला तगड़ा दांव, किसानों के लिए बड़ा प्लान तैयार; ‘2027 में जीते तो 24 घंटे में करेंगे गन्ने का भुगतान’

 पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से वार्ता के लिए कौशांबी के होटल रेडिसन ब्लू में विजन इंडिया संस्था के तहत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसानों से वर्चुअल संवाद किया।

उन्हें कार्यक्रम में आना था, लेकिन विमान में तकनीकी खामी के कारण उनके आने का कार्यक्रम ऐन वक्त पर रद हो गया। गन्ना से लेकर आलू बोने वाले किसानों, उनकी समस्याओं पर सपा प्रमुख ने चर्चा की।

मंच पर विजन इंडिया के संयोजक डा. अभिषेक मिश्रा, सांसद हरेंद्र मलिक, सांसद इकरा हसन थीं जबकि अखिलेश यादव के साथ पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और कृषि वैज्ञानिक प्रो. प्रभात यादव थे।

अखिलेश ने किसानों से किए सवाल

अखिलेश यादव से किसानों ने सवाल शुरू किए। उत्तर प्रदेश के किसान दुनिया को सीधे अनाज, फल या सब्जी कैसे निर्यात करें, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी बन सकती हैं तो स्मार्ट विलेज क्यों नहीं। सपा सरकार ने एक्सप्रेसवे बनवाए, इसके पीछे भी यही मकसद था कि ग्रामीण इलाकों को शहरों से जोड़ा जा सके। किसानों के सामने चुनौतियां हैं, इनसे बाहर कैसे निकलें इस पर काम होना चाहिए।

गन्ना किसान के सवाल पर सपा प्रमुख ने कहा कि किसानों की पर्ची कटने के साथ ही उनके खाते में भुगतान आए, ऐसी व्यवस्था सपा सरकार में आने पर करेगी। सरकार में रहते हुए हमने विशेष मंडियां भी बनवाईं। आलू उत्पादकों के पास भंडारण के पर्याप्त संसाधन नहीं होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाएगी।

बढ़ रहा बैंकों का ऋण, आत्महत्या कर रहे किसान

किसानों ने संवाद में कहा कि धान और आलू की बुआइ के लिए किसान बैंकों से ऋण ले रहे हैं। ऋण किसान चुका नहीं पा रहे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि खेत मुस्कुराएगा तो देश मुस्कुराएगा, आंकड़ें देखे तो भयावह स्थिति है। इसका कारण खेती में आ रही दिक्कतें और मेहनत की सही कीमत नहीं मिलना है। कृषि आयोग इस दिशा में काम करे। किसान का बेटा किसान क्यों नहीं बनना चाहता है।

 

आंकड़े बताते हैं कि किसान का शिक्षित बच्चा खेती-किसानी नहीं करना चाहता है। अगर विकल्प मिले तो एक-तिहाई से ज्यादा किसान खेती छोड़ दें। आज खेतीबाड़ी और गांव में जो मुश्किल हैं, उसी की वजह से किसान खुद को पीड़ित और परेशान महसूस करता है।

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