इस साल देश में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। बारिश कम होने, समुद्री परिस्थितियों में बदलाव और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान वर्षा के संकेत मिल रहे हैं। तीनों कारणों के असर से 2026 के मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा अनुमान के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच देश में कुल बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रह सकती है। इसे सामान्य से कम यानी कमजोर मानसून की श्रेणी में रखा जाता है।
आमतौर पर 90 से 95 प्रतिशत के बीच की वर्षा को सामान्य से कम (बिलो नॉर्मल) माना जाता है। हालांकि इस अनुमान में पांच प्रतिशत तक की त्रुटि संभव है। मतलब वास्तविक बारिश से थोड़ी ज्यादा या कम हो सकती है।
कमजोर मानसून की क्या है वजह?
आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती पूर्वानुमान है और मई के अंतिम सप्ताह में संशोधित अनुमान जारी किया जाएगा। फिर भी मौजूदा संकेत कृषि, जल प्रबंधन और अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क रहने की जरूरत बता रहे हैं।
कमजोर मानसून की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में बनने वाली अल-नीनो स्थिति मानी जा रही है। फिलहाल स्थिति तटस्थ है, लेकिन जलवायु मॉडलों के अनुसार जून के आसपास अल-नीनो विकसित हो सकता है।
इस स्थिति में समुद्र का तापमान बढ़ता है, जिससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में सामान्यत: बारिश घट जाती है।हालांकि पूरे देश में इसका असर एक जैसा नहीं होगा।
अनुमान है कि कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है, जबकि उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा संभव है। यानी इस बार मानसून की प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय असमानता हो सकती है। कुछ राहत हिंद महासागर से मिल सकती है।
जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) के बीच पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (आइओडी) बन सकता है।
इस स्थिति में हिंद महासागर का अफ्रीका वाला हिस्सा ज्यादा गर्म हो जाता है तो भारत में बारिश बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इससे अल-नीनो भी काफी हद तक संतुलित रहता है, क्योंकि जब हिंद महासागर का अफ्रीका वाला हिस्सा ज्यादा गर्म हो जाता है तो भारत में बारिश बढ़ने की स्थिति बनती है।
इसके अलावा, जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का दायरा सामान्य से थोड़ा कम रहा है। आमतौर पर यह स्थिति मानसून के लिए अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि कम बर्फबारी और गर्म सतह से हवा का दबाव तंत्र मानसून को सहारा देता है। हालांकि यह कारक अल-नीनो के कारण उभरने वाले नकारात्मक असर को कितना संतुलित कर पाएगा, इसपर स्पष्टता नहीं है।
आईएमडी के अनुसार देश में इस बार कुल मौसमी वर्षा लगभग 80 सेंटीमीटर रहने का अनुमान है, जबकि दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर है।
हालांकि आईएमडी ने यह भी माना है कि समुद्री परिस्थितियों के बदलते समीकरणों के कारण तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। ऐसे में कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के लिहाज से यह मानसून सतर्कता और बेहतर योजना की मांग करता है।


