सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला के कपड़े उतारने का वीडियो जारी करने की धमकी देना गंभीर अपराध, सजा बरकरार

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी महिला के कपड़े उतारने या स्नान करने के वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर जारी करने की धमकी देना उस पर अनैतिकता के आरोप लगाने की धमकी देना माना जाएगा और यह भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी देने का अपराध है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने उस एक व्यक्ति की आइपीसी की धारा 506 के भाग द्वितीय के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखने के दौरान की, जिसने एक महिला के नहाते हुए निजी वीडियो को फेसबुक पर अपलोड करने की धमकी दी थी।

पीठ ने कहा, “हमारा मानना है कि महिलाओं की कामुकता के बदले हुए दृष्टिकोण के मद्देनजर पीड़िता के नहाते समय नग्न अवस्था में वीडियो रिकार्ड करना और इसे डिजिटल इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करने की धमकी देना आईपीसी की धारा 506 के भाग द्वितीय के तहत अनैतिकता के आरोप लगाने की धमकी देने के समान एक कृत्य माना जा सकता है।”

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपित ने विवाह का झूठा वादा करके उसके साथ यौन संबंध बनाए थे।

उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपित ने उसके नहाते समय के वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करने की धमकी दी थी, जिसे उसने कथित तौर पर रिकॉर्ड किया था।

छापों में ममता के रुकावट डालने संबंधी ईडी की याचिका अगस्त में सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह ईडी की उस याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई करेगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि आठ जनवरी को कोलकाता में राजनीतिक परामर्शदाता कंपनी आइ-पैक के कार्यालय में तलाशी के दौरान बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व राज्य के अन्य अधिकारियों ने रुकावट डाली थी।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह गर्मियों की छुट्टियों के बाद इस मामले की सुनवाई करेगी। हाल ही में संपन्न बंगाल चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है और ममता बनर्जी के 15 वर्ष के शासनकाल को समाप्त कर दिया है।

ईडी ने 23 अप्रैल को बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि ममता बनर्जी ने आइ-पैक के विरुद्ध मनी लांड्रिंग की जांच में रुकावट डालने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया।

ईडी का कहना था कि ममता ने पुलिस के एक बड़े दस्ते के साथ तलाशी रोकने और संघीय एजेंसी के अधिकारियों द्वारा जुटाए सुबूतों को जब्त करने के लिए खुद दखल दिया था।

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