सड़कों पर जब कोई गाड़ी निकलती है जो उसके नंबर के शुरुआती अक्षरों से पता चल जाता है कि वह किस राज्य की है। जैसे DL का मतलब दिल्ली और UP का मतलब उत्तर प्रदेश। लेकिन आपने अक्सर सड़कों पर BH (Bharat Series) की नंबर प्लेट भी देखी होगी। आइए जानते हैं कि क्या हैं इसके फायदे और लेने का तरीका।
किसे मिल सकती है BH नंबर प्लेट?
BH नंबर प्लेट सभी को नहीं मिलता बल्कि इसके लिए कुछ चुनिंदा लोग ही अप्लाई कर सकते हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। सेना और बैंक में काम करने वाले कर्मचारी भी इसे ले सकते हैं। प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी भी इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा, ऐसी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी भी इसे ले सकते हैं जिनके ऑफिस चार या उससे ज्यादा राज्यों में हों।
BH नंबर प्लेट के फायदे और नुकसान
यह नंबर प्लेट उन लोगों के लिए है ज्यादा फायदेमंद है जिन्हें नौकरी की वजह से बार-बार एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता है। दूसरे राज्य में शिफ्ट होने पर आपको गाड़ी का दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करवाना पड़ता। BH नंबर प्लेट पूरे भारत में वैध होती है इसलिए आप इस गाड़ी को देश में कहीं भी ले जा सकते हैं।
इसका सबसे बड़ा नुकसान है कि यह सुविधा सभी आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है। ट्रांसपोर्ट या कमर्शियल काम में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां इस नंबर प्लेट का इस्तेमाल नहीं कर सकता हैं।
BH नंबर लेने का तरीका
इसे लेने के लिए सबसे पहले सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) के Vahan पोर्टल पर लॉग इन करें। आपको पोर्टल पर फॉर्म-20 भरना होगा और जो लोग प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं उन्हें फॉर्म-16 भरना होगा। आवेदन के साथ अपनी एम्प्लॉई आईडी और वर्क सर्टिफिकेट भी जमा करना होगा। इतना होने के बाद सरकारी अधिकारी आपकी योग्यता की जांच करेंगे।
जांट के बाद आपको नंबर की कैटेगरी में से BH विकल्प को चुनना होगा। RTO से मंजूरी मिलने के बाद आपको फीस जमा करनी होगी। फीच चुकाने के बाद आपकी गाड़ी के लिए BH नंबर सीरीज मिल जाएगा।


