नवजात बच्चों की तस्करी: कभी ड्राइवर था गिरोह का सरगना, धंधे में नर्स पत्नी का बड़ा रोल; अवैध को ऐसे बनाते थे लीगल

 नवजात बच्चों को खरीदने और लाखों रुपये में बेचने के मामले में रोजाना कोई न कोई नया खुलासा हो रहा है। जहां पैसों की लालच में गिरोह के एक सदस्य द्वारा अपने ही बच्चों को बेचने का मामला पहले सामने आया था। वहीं अब गैंग के सरगना लाडी और उसके परिवार को लेकर भी कई बातें सामने आ रही हैं।

उसकी पत्नी और साली की गिरोह में संलिप्तता के साथ ही पूरे परिवार के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं। अभी तक की जांच में देश के 10 राज्यों के अंदर इस गिरोह द्वारा 50 से अधिक बच्चों को बेचने के मामलों का पता चल चुका है।

गिरोह सरगना के पकड़े जाने के बाद यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी 40 की ही पुष्टि की है। दो बच्चे भी बरामद हुए चुके हैं। एक बच्चे के माता-पिता भी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। अभी तक नौ आरोपित पकड़े में आए हैं, वहीं छह रिमांड पर हैं।

गाड़ी ड्राइवर रहा है गिरोह सरगना लाडी, पत्नी-साली संग शुरू किया अवैध धंधा

पुलिस की जांच में पता चला है कि फरार चल रहा इस गिरोह का सरगना प्रगट सिंह पंजाब के मुक्तसर के जलालाबाद रोड स्थित कॉलोनी का रहने वाला है।

पुलिस उसकी तलाश में घर के अलावा कई जगह छापेमारी कर चुकी है, लेकिन अभी कोई भी हाथ नहीं आया। पूरा परिवार फरार है। पुलिस को प्रगट सिंह के अलावा उसकी पत्नी व साली की भी तलाश है। उनके साथ मिलकर ही लाडी ने यह अवैध धंधा शुरू किया। पहले वह गाड़ी चलाता था।

चूंकि उसकी पत्नी नर्स है, इसलिए अस्पतालों के जरिये बच्चा बेचने वाले दंपतियों को तलाशा जाता था। नि:संतान दंपतियों की संख्या और उनकी संतान की चाहत को देख गिरोह ने यह धंधा खूब फैलाया।

कुछ मामलों में लाडी की पत्नी द्वारा घर में ही गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी करवाए जाने की बात सामने आई है। इसकी पुष्टि लाडी के पकड़े जाने पर हो सकेगी।

टैक्सी चलाते हुए लाडी के संपर्क में आए, फिर गिरोह के सदस्य बन गए

पुलिस ने बताया कि शुरूआत में पकड़े गए गाजियाबाद के रहने वाले आकिल मलिक और सलीम अहमद पहले टैक्सी चलाते थे। बाद में सलीम ने करियाना की दुकान खोल ली और आकिल ने सीएससी सेंटर शुरू किया।

टैक्सी चलाने के दौरान ही ये गिरोह सरगना लाडी के संपर्क में आए। चूंकि लाडी ने गुरु कृपा एडॉप्शन एजेंसी के नाम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेज बना रखा था। इसी के जरिये नि:संतान दंपती उनके संपर्क में आते थे।

पहले टोकन मनी फिर बच्चे के सभी टेस्ट

जो बच्चा खरीदते थे, पहले उनसे टोकन मनी ली जाती थी। फिर डिलीवरी के बाद बच्चे के सभी टेस्ट की रिपोर्ट भी तैयार करते थे, ताकि जो बच्चा खरीद रहे हैं उनको पूरा यकीन दिला सकें कि बच्चा स्वस्थ है।

जिनका बच्चा खरीदते थे, उनके सामने भी यही शर्त होती थी कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होगा, तभी खरीदा जाएगा। इतना ही नहीं दिखावे के लिए बच्चा खरीदने वालों से एफिडेविट व अन्य दस्तावेज भी बनवाए जाते थे, ताकि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी लगे। बच्चा बेचने वालों से कोरे कागजात पर हस्ताक्षर या अंगूठा लगवा लिया जाता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *