इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा भुगत रहे जीभ में कैंसर से ग्रसित बाबा यादव की समय पूर्व रिहाई मामले में निर्णय से अवगत कराने संबंधी आदेश का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है।
निर्देश दिया है कि अपर मुख्य सचिव (गृह) बताएं कि क्या निर्णय लिया गया है अथवा 16 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर हों।यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बाबा यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याची जौनपुर के जफराबाद थाना क्षेत्र में हुए अपराध में दोषसिद्धि है और राज्य बनाम राजेश सिंह व अन्य केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसका कहना है कि लंबे समय से जेल में बंद है। कैंसर से पीड़ित है तथा नियमानुसार समय पूर्व रिहाई का हकदार हैं।
उसने राज्य सरकार को अर्जी दी है। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता से एक हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।
कहा था कि अपर मुख्य सचिव गृह बताएं कि क्या निर्णय लिया गया? आदेश की सूचना सीजेएम लखनऊ के मार्फत भेजी गई, लेकिन एसीएस (गृह) ने कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई तिथि 16 अप्रैल तक एसीएस गृह को हलफनामा दाखिल करने अथवा हाजिर होने का निर्देश दिया है।


