सामान्य बस से 20% सस्ता किराया, फिर भी घाटे में ग्रामीण बसें; गांव को मुख्यालय से जोड़ने की कोशिश बनी नासूर

ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन व्यवस्था सुगम बनाने के लिए महीनों पहले दो बसों का संचालन शुरू किया गया था। जो अब रोडवेज के लिए नासूर बन चुकी हैं। सामान्य बस के मुकाबले बीस प्रतिशत कम किराये के बाद भी ये बसें निर्धारित 57 प्रतिशत राजस्व भी प्राप्त नहीं कर पा रही हैं। संचालन से निगम को घाटा हो रहा है साथ ही जो चालक-परिचालक बस लेकर जाते हैं उनकी तनख्वाह से भी कटौती होती है।

दो रूट पर बसों का संचालन हो रहा है। एक बस लोदाना के लिए जाती है जो कि परी चौक व जहांगीरपुर के रूट पर चलती है। दूसरी बस दादरी से कलौंदा कट के बीच चलती है। सवारी न मिलने के कारण अधिकांश समय बसें खाली ही चलती हैं। इस वजह से औसतन 36 प्रतिशत राजस्व ही मिल रहा है।

हालांकि, निगम के अनुसार बस के किसी रूट पर चलने से उससे न्यूनतम 57 प्रतिशत राजस्व मिलने से लाभ मिलता है। राजस्व कम रहने से चालक और परिचालक की तनख्वाह में से भी कटौती कर दी जाती है। स्टाफ भी इन बसों में ड्यूटी करने से बच रहे हैं। एआरएम रोहिताश कुमार ने बताया कि बसों में सवारियों की संख्या कम रहती है जिस वजह से राजस्व भी कम रहता है।

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