प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर लगी पांच साल पुरानी रोक को हटा ली है। यह रोक सेक्टर-78, 79, 150 और 152 पर थी। अब यहां बिल्डरों को कंडीशनल ओसी जारी की जाएगी। साथ ही निर्माण पूरा होने तक 20 प्रतिशत इन्वेंट्री प्राधिकरण अपने पास गिरवी रखेगा। प्राधिकरण ने वर्ष 2021 से इस पर रोक लगा थी। इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोर्ड बैठक में चेेयरमैन से अनुमोदन के बाद हटा लिया गया है।
40 हजार फ्लैट खरीदारों को फायदा
इससे करीब 40 हजार फ्लैट खरीदारों को फायदा होगा, उनको उनके आशियाना पर मालिकाना हक मिल सकेगा। प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल ने बताया कि ओसी तभी जारी होगी जब तीन साल में बिल्डर खेल गतिविधियों के लिए निर्माण पूरा कर लेगा। मानचित्र तभी स्वीकृत होंगे, जब कुल बकाया का 20 प्रतिशत जमा करेंगे।
महायोजना को 2009 तक बढ़ाया गया
बता दें कि नोएडा में स्पोर्ट्स एक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना की कार्ययोजना तैयार की। वर्ष 2008 में पहली बार स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत महा योजना निकाली गई। महायोजना को 2009 तक बढ़ाया गया। इसके बाद इसमें लैंड को बढ़ाते हुए 2010-11 से 2015-16 के बीच 32 लाख 30 हजार 500 वर्गमीटर जमीन के लिए 2010-11 में सेक्टर-78,79,101,150, साल 2014-15 में सेक्टर-150 और 2015-16 में सेक्टर-152 योजना निकाली गई।
बकाया प्राधिकरण में जमा नहीं कराया
योजना के तहत चार चार कंसोर्टियम बिल्डर को जमीन अलाॅट की गई। उन्होंने 81 उप भूखंड में तोड़ते हुए बिल्डरों को सब लीज की लेकिन करीब 12 हजार करोड़ बकाया प्राधिकरण में जमा नहीं कराया। इसी के चलते प्राधिकरण ने 2021 में 201वीं बोर्ड बैठक में मानचित्र स्वीकृत पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस रोक को हटा लिया गया, लेकिन शर्त अब भी जारी है। नियम के तहत बिल्डर को 70 प्रतिशत जमीन का प्रयोग स्पोर्ट्स एक्टिविटी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना था।
स्पोट्र्स का नहीं किया कोई काम
इसके अलावा 30 प्रतिशत में 28 प्रतिशत आवासीय व ग्रुप हाउसिंग और दो प्रतिशत व्यवसायिक प्रायोजन के लिए था। इसमें 12 हजार 500 रुपये प्रति वर्गमीटर दर तय की गई। योजना के तहत जानडु एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को सेक्टर-78,79 और 101 में 727500 वर्गमीटर जमीन, लाजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को एससी-01/150 में 8 लाख वर्गमीटर, लोट्स ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड एससी-02/150 को 12 लाख और एटीएस को एससी 01/150 को 5 लाख 3 हजार वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई लेकिन यहां स्पोर्ट्स एक्टिविटी के लिए काम नहीं किया गया।
इन शर्तों का करना होगा पालन
- अधिभोग में टावर के साथ लगा क्षेत्र सम्मिलित नहीं है, स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के 70 प्रतिशत का हिस्सा है।
- आवंटी द्वारा वाणिज्यिक विभाग से नियमानुसार टाइम एक्सटेंशन प्रमाण पत्र लेना होगा।
- एनजीटी में योजित प्रार्थना पत्रों के निर्णय के अनुपालन में आवंटी बाध्य है।
- भवन नियमावली 2010, उप्र अपार्टमेंट एक्ट 2010 व 2016 उप्र रियल स्टेट रेग्यूलेटरी एक्ट 2016, पर्यावरण विभाग के सभी अधिनियमों का पालन करना होगा।
- आवंटी नेशनल बिल्डिंग कोड एनबीसी में उल्लेखित शर्तो का पालन करना होगा।
- मानचित्रों और अधिभोग प्रमाण पत्र में दर्शायी गई माप, क्षेत्रफल, पार्किंग, हरित एरिया, सुविधाएं तथा सेवाओं को पूर्व में स्वीकृति के सापेक्ष
- प्राधिकरण की बिना पूर्व अनुमति के स्थल पर परिर्वतन या संशोधन आदि किया जाना अनधिकृत माना जाएगा। उसे तत्काल ध्वस्त किया जाएगा।
- ब्रोशर में दिए गए सेवाओं को पूरा करना होगा।
- योजना में शामिल में जल, विद्युत, सीवरेज, अग्निशमन, लिफ्ट, वर्षा जल प्रणाली, जल संरक्षण, रिसाइकलिंग जैसे कायग् को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखना होगा।
- आवंटी को योजना में बने टावर की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करनी होगी। किसी की जान माल के नुकसान की जिम्मेदारी आवंटी की होगी।
- आवंटी अपने यूनिट्स उप पट्टा धारकों को प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही फ्लैट पर कब्जा देगा।
- समायोजन शुल्क आवंटी को जमा करना होगा।
- सभी टावरों के बीच की दूसरी भवन विनियमावली के प्रविधानों के अनुरूप होगी।
- आवंटी संस्था को विजिटर कार पार्किंग की सुविधा परिसर के अंदर करनी होगी। सड़क पर कोई पार्किंग नहीं होगी।
- बेसमेंट पार्किंग में ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की व्यवस्था करनी होगी।
- इंटरनेट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना होगा।
- आशंक अधिभोग इस शर्त पर जारी किया जा रहा है कि दो महीने के अंदर परियोजना की सर्विसेज जिसमें सीवरेज, वाटर सप्लाई, ड्रेनेज, विद्युत, रोड, ग्रीन व ब्रोशर के तहत दिए गए क्षेत्र का डिमार्केशन का सत्यापन परियोजना विभाग से प्राप्त किया जाएगा।
- उप्र अपार्टमेंट एक्ट 2020 के अनुसार आवंटी संस्था को डीओडी एक महीने के अंदर वाणिज्यिक विभाग में उपलब्ध कराते हुए उसकी एक प्रति नियोजन विभाग में देनी होगी।


