इस वर्ष मार्च का महीना मौसम के अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के साथ विदा हुआ। महीने के पहले पखवाड़े में जहां असामान्य गर्मी ने लोगों को हैरान किया, वहीं दूसरे पखवाड़े में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
प्रदेशभर में इस महीने 14.7 एमएम वर्षा दर्ज की गई। मार्च महीने की बारिश ने फसलों को जमीन पर लगा दिया, अब अप्रैल की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने में भी मौसम का यही अस्थिर रुख जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे गेहूं कटाई के समय किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक दो अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जो तीन व चार अप्रैल को पूरे प्रदेश में आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दे सकता है। मौसम विभाग ने बदलते मौसम को लेकर येलो व आरेंज अलर्ट की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता अधिक रही, तो तैयार खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
मार्च के पहले पखवाड़े में तापमान सामान्य से अधिक रहा, जिससे गर्मी का अहसास समय से पहले होने लगा। ऐसे समय में गेहूं को ठंड की जरूरत थी, लेकिन सामान्य से अधिक गर्मी ने किसानों को बेचैन कर दिया। हालांकि अच्छी बात ये रही कि यह गर्मी ज्यादा दिन तक नहीं ठहर सकी, उसके बाद एक के बाद एक आए पश्चिमी विक्षोभों ने मौसम को तो संतुलित कर दिया, लेकिन जो वर्षा व ओलावृष्टि हुई, उसका असर फसलों पर व्यापक देखने को मिला।
फसलें बिछ गई। यह बदलाव न केवल आमजन के लिए चौंकाने वाला रहा, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी चिंता का कारण बन गया। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में प्रदेश में 15.0 मिमी के सामान्य अनुपात के मुकाबले 14.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, बारिश का यह वितरण असंतुलित रहा, जिससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
अप्रैल का महीना गेहूं की कटाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, लेकिन इसी दौरान मौसम के बिगड़ने की संभावना किसानों के लिए चिंता का विषय है। बारिश या ओलावृष्टि होने पर खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है। जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। क्योंकि तीन व चार अप्रैल के अलावा आठ अप्रैल को भी मौसम परिवर्तन की चेतावनी जारी की गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें और फसल कटाई का कार्य समय पर पूरा करें। साथ ही, कटाई के बाद फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और तिरपाल आदि का प्रबंध करने की भी सलाह दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता अधिक बनी हुई है, जो बार-बार मौसम में बदलाव ला रही है। यही कारण है कि कभी तेज धूप और कभी अचानक बारिश जैसे हालात बन रहे हैं। ऐसे समय में एक ओर जहां किसान फसल की कटाई की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम की अनिश्चितता उन्हें चिंता में डाल रही है। यदि मौसम ने साथ नहीं दिया, तो मेहनत पर पानी फिर सकता है।


