जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकियों के मददगार दो सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त की। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की पहचान फरहत अली खांडे (शिक्षा विभाग रामबन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) और मोहम्मद शफी डार (ग्रामीण विकास विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के रूप में हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, खांडे के हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करने की बात सामने आई है जबकि डार पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सहयोगी के रूप में काम करने का आरोप है।
सरकारी तंत्र में बैठ आतंकियों और अलगाववादियों की मदद करने वाले सफेदपोश आतंकी तत्वों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को जारी रखते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को दो और सरकारी कर्मियों को सेवामुक्त कर दिया।
इनमें से एक शिक्षा विभाग में बैठ हिजबुल मुजाहिदीन के लिए वित्तीय नेटवर्क चलाने के अलावा उसके लिए स्थानीय कैडर को जुटा रहा था जबकि दूसरा ग्रामीण विकास विभाग का कर्मी है जो ग्राम विकास के बजाय लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी-जिहादी गतिविधियों को विस्तार दे रहा था।
नौकरी से निकाले गए कर्मियो की पहयान
बर्खास्त किए गए कर्मियाें की पहचान फरहत अली खांडे (शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) और मोहम्मद शफी डार (ग्रामीण विकास विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के रूप में हुई है। इन दोनों के खिलाफ उपलब्ध सभी साक्ष्यों और इनकी गतिविधियों का संज्ञान लेने के बाद ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा नेभारत के संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर इनकी सेवाएं समाप्त की हैं।
अब तक 95 कर्मचारियो की गई नौकरी
मौजूदा वर्ष में आतंकियों का साथ देने वाले किसी सरकारी कर्मी की सेवाएं समाप्त किए जाने का यह तीसरा मामला है। इससे पूर्व 10 मार्च को तीन, 13 जनवरी को पांच कर्मियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। बीते वर्ष बीते वर्ष 2025 में उपराज्यपाल ने 30 अक्टूबर को दो सरकारी अध्यापकों की सेवाएं समाप्त की थी और उससे पहले 22 अगस्त को दो, तीन जून को तीन व 15 फरवरी को आतंकियों के मददगार तीन सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त की थी। बीते पांच वर्ष में प्रदेश सरकार अब तक आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों में लिप्त 95 सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर चुकी है।


