चुनौतियों के बावजूद देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में श्रेष्ठ है जम्मू-कश्मीर, औसत आयु में देश में तीसरे स्थान पर प्रदेश

जम्मू-कश्मीर का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग भले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा हो लेकिन यहां के लोगों का स्वास्थ्य देश के कई प्रदेशों से बेहतर है। औसत आयु से लेकर मरीजों और डाक्टरों के अनुपात को लेकर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। हालांकि सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रसव सिजेरियन सेक्शन से अधिक होना जरूर व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) और सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम बुलेटिन 2020 के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में कई स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।जम्मू-कश्मीर के लोगों का औसत जीवनकाल 74.3 वर्ष है जो कि देश में तीसरा सबसे बेहतर है। जम्मू-कश्मीर से ऊपर सिर्फ केरल और दिल्ली के लोगों की औसत आयु है।

राज्य में शिशु मृत्यु दर 16.3 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई है जो राष्ट्रीय औसत 35.2 से काफी कम है। इसी प्रकार, नवजात मृत्यु दर 9.8 प्रति 1,000 जीवित जन्म है जबकि राष्ट्रीय औसत 24.9 है।इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में एक हजार जनसंख्या पर मृत्यु दर 4.6 है जो राष्ट्रीय औसत 6 से बेहतर है। जन्म के समय लिंगानुपात में भी सुधार देखा गया, जहां प्रति 1,000 लड़कों पर 976 लड़कियां जन्म ले रही है, जो राष्ट्रीय औसत 929 से अधिक है।

कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में राज्य अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे

हालांकि, कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में राज्य अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे है। उदाहरण के लिए, गर्भावस्था के दौरान टेटनेस से सुरक्षा प्राप्त करने वाली माताओं का प्रतिशत 29.8 रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत 44.1 प्रतिशत है। इसी तरह, 100 दिनों तक आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां लेने वाली माताओं का प्रतिशत 15.9 रहा, जो राष्ट्रीय औसत 26 प्रतिशत से कम है।

जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रति डिलीवरी औसत जेब से खर्च 5,145 रहा, जो राष्ट्रीय औसत 2,916 से अधिक है।संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 42.7 प्रतिशत और निजी अस्पतालों में 82.1 प्रतिशत प्रसव सिजेरियन सेक्शन के माध्यम से हुए जबकि राष्ट्रीय औसत क्रमशः 14.3 प्रतिशत और 47.4 प्रतिशत है।

पंजाब व हरियाणा से बेहतर है जम्मू-कश्मीर की स्थिति

डाक्टरों की उपलब्धता की बात की जाए तो जम्मू-कश्मीर की स्थिति अपने पड़ोसी प्रदेशों से बेहतर है। जम्मू-कश्मीर में 2,191 लोगों के लिए एक सारी डाक्टर है। 2461 लोगों के लिए एक एलौपैथी डाक्टर है जबकि हरियाणा में 6212 लोगों के लिए एक एलौपैथी डाक्टर और पंजाब में 6390 लोगों के लिए एक एलौपैथी डाक्टर है।

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