ग्रेटर नोएडा में मच्छरों का आतंक जारी, लार्वासाइड छिड़काव के दावों पर सवाल; क्या कर रहीं 36 टीमें

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मच्छरों के प्रकोप से बचाव के लिए 36 टीमों का गठन कर लार्विसाइड का छिड़काव फिर शुरू कर दिया है। बावजूद इसके सेक्टरों और सोसायटियों में मच्छरों की संख्या में कहीं कोई कमी नहीं आ रही है।

अस्पतालों में इस मौसम में भी डेंगू और मलेरिया के मामले पहुंच रहे हैं। अमूमन अगस्त से अक्टूबर के बीच मामलों में बढ़ोतरी होती है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग ने लार्विसाइड छिड़ाकाव का अप्रैल का शेड्यूल जारी कर 36 टीमें को जिम्मेदारी सौंपी है।

टीम द्वारा सभी सेक्टरों और गांवों में तीन-तीन बार छिड़काव किया जाएगा। यदि कर्मचारी इन शेड्यूल के मुताबिक छिड़काव नहीं करते हैं तो संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।

ये है छिड़काव का पूरा शेड्यूल

हर महीने प्राधिकरण की ओर से मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए लार्विसाइड के छिड़काव का शेड्यूल जारी किया जाता है। इसके बाद भी शहर के सभी इलाकों में मच्छरों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।

एक से 10 अप्रैल और 21 से 30 अप्रैल तक हर दिन ग्रेटर नोएडा ईस्ट और ग्रेटर वेस्ट के सेक्टरों व गांवों में छिड़काव किया जाएगा। हर टीम में सुपरवाइजर समेत चार सदस्य हैं।

प्राधिकरण के मुताबिक छिड़काव के लिए हर महीने 15 से 20 लाख रुपये का बजट जारी किया जाता है। टीम द्वारा फागिंग और लार्विसाइड करने के दौरान की फोटो भेजने और निवासियों से रिकार्ड बुक में हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है। इसकी निगरानी का भी दावा किया जा रहा है।

सरकारी दावों से उलट है निवासियों की सच्चाई

वहीं निवासियों का कहना है कि सिर्फ खानापूरी की जा रही है। सेक्टर बीटा-दो निवासी हरेंद्र ने बताया कि टीम द्वारा प्रमुख ड्रेन में दवा का छिड़काव करना चाहिए, सेक्टरों और गांव की हर गलियों में फागिंग करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। लोगों से हस्ताक्षर भी नहीं कराए जा रहे हैं।

सेक्टर की हर गली में दो निवासियों से हस्ताक्षर लेने चाहिए, लेकिन नहीं लिए जा रहे। यदि यही हाल रहा तो मच्छर जनित बीमारियों पर लगाम लगाना काफी मुश्किल होगा।

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