महानगरों से आवागमन करने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। विशेषकर मुंबई जाने वाली गाड़ियों के जनरल कोच में सवार होना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। आरक्षण न होने के कारण बड़ी संख्या में लोग सामान्य टिकट पर यात्रा करने के लिए विवश हैं।
हालांकि लंबी दूरी की गाड़ियों में जनरल कोच की संख्या सीमित होने के कारण शत प्रतिशत यात्रियों का सवार होना मुश्किल हो गया है। सौ यात्री टिकट खरीद रहे हैं तो 70-80 ही सवार होने में सफल हो पा रहे हैं जबकि शेष लोग टिकट वापस कर निराश मन से घर लौट रहे हैं। यात्रियों के अनुसार महानगर जाने वाली गाड़ियों में जनरल कोच की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए।
वाराणसी-जंघई रेलखंड से देश की आर्थिक राजधानी तक जाने वाली सिर्फ दो गाड़ियां हैं। गोरखपुर से एलटीटी मुंबई के बीच 15017-18 काशी दादर एक्सप्रेस, बलिया-एलटीटी मुंबई के बीच 11071-72 कामायनी ही प्रतिदिन चलती है जबकि गोरखपुर-एलटीटी मुंबई के बीच सुपर फास्ट गाड़ी रत्नागिरी एक्सप्रेस का सप्ताह में तीन दिन संचालन होता है।
यात्रियों के अधिक दबाव के कारण तीनों गाड़ियों में तत्काल टिकट मिलना भी मुश्किल है। ऐसे में जिन लोगों को बेहद जरूरी कार्य है वे चालू टिकट पर यात्रा करने के लिए विवश हैं। हालांकि इसमें भी शत प्रतिशत यात्रियों को सफलता नहीं मिल रही है।
बुकिंग पर्यवेक्षक राजकुमार यादव का कहना है कि बलिया से चलने वाली कामायनी एक्सप्रेस पहले से फुल रहती है। इसी तरह रत्नागिरी एक्सप्रेस के जनरल कोच में सवार होना मुश्किल है। कहा कि चालू टिकट तो बिक रहे हैं लेकिन 20 प्रतिशत वापसी हो रही है।


