अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट और तीन वनडे मैचों के लिए टीम इंडिया का एलान हो गया है। इस एलान के बाद एक बार फिर चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और उनकी समिति निशाने पर है। भारत के पूर्व कप्तान ने टीम सेलेक्शन पर सवाल उठाए हैं और रणजी ट्रॉफी के प्रदर्शन को प्राथमिकता न देने पर गुस्सा जाहिर किया है।
सेलेक्शन कमेटी ने इस सीजन रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज आकिब नबी को नजरअंदाज किया है। उनकी जगह टीम में पक्की मानी जा रही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसी को लेकर दिलीप वेंगसरकर ने अपना गुस्सा जाहिर किया है।
‘रणजी ट्रॉफी बंद कर दो’
वेंगसरकर ने कहा है कि अगर रणजी ट्ऱ़ॉफी के प्रदर्शन को नजरअंदाज ही किया जाना है तो फिर इसे हटा देना चाहिए। आकिब ने पिछले सीजन 60 विकेट अपने नाम किए थे और जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम रोल निभाया था।
वेंगसकर ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, “सेलेक्टर्स का उन्हें नजरअंदाज करना बेतुका और हैरान करने वाला है। ये किस तरह का सेलेक्शन है? ये मंजूर नहीं है। ये अन्याय है। क्या आप सोच सकते हैं कि नबी की इस समय क्या स्थिती होगी? उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट लिए हैं। उन्होंने काफी मेहनत की थी और हर टीम में जगह पाने के हकदार थे।”
उन्होंने कहा, “अगर घरेलू क्रिकेट का प्रदर्शन पैमाना नहीं है तो फिर बीसीसीआई को घरेलू क्रिकेट को हटा देना चाहिए।”
गेंदबाज विकेट लेता है
वेंगसरकर ने कहा कि गेंदबाज का काम विकेट लेना है फिर चाहे वो 130 की रफ्तार से ही गेंद क्यों न फेंके। पूर्व चीफ सेलेक्टर ने कहा, “आप गेंदबाज को उसकी विकेट लेने की काबिलियत पर चुनते हैं। वह 130 किलोमीटर पर गेंदबाजी कर सकता है, लेकिन अहम बात ये है कि उसके पास विकेट लेने की योग्यता होनी चाहिए। आकिब ने विकेट लेने के मामले में गजब की निरंतरता दिखाई है।”
उन्होंने कहा, “ये सही समय था कि उनको ग्रूम किया जाता। जब खिलाड़ी फॉर्म में होता है तो आप उसको कहीं न कहीं मौका देते हैं। आप तब तक इंतजार नहीं करते जब वह अपना आत्मविश्वास, फिटनेस और भूख न हो खो दे।”


