राज्य में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस सुस्ती को लेकर खान एवं भू-तत्व विभाग सख्त हो गया है।
कई जिलों में बड़ी संख्या में बालू घाटों की अब तक नीलामी न होने और बंदोबस्ती कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
कहा गया है कि वे तत्काल अनीलामित लंबित घाटों की नीलामी और वैधानिक स्वीकृतियां सुनिश्चित करें। खान एवं भू-तत्व विभाग की जानकारी के अनुसार राज्य के कुल 463 पीला बालूघाटों में से अब तक 306 घाटों की नीलामी की जा चुकी है।
अनिलामित घाटों के नीलामी के लिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
वहीं 180 बालूघाटों के लिए कार्यादेश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद कई जिलों में नीलामी प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है।
इससे राजस्व संग्रह और बालू आपूर्ति दोनों प्रभावित होने की आशंका है। जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो औरंगाबाद में सर्वाधिक 57 बालू घाटों की नीलामी नहीं हुई है।
गया में 20, जहानाबाद में 12, पटना और नवादा में 11-11, भोजपुर में 10, रोहतास और नालंदा में 8-8, जमुई में सात, लखीसराय और भागलपुर में पांच-पांच तथा अरवल में तीन बालूघाटों की नीलामी लंबित है।
पारदर्शी तरीके से करें नीलामी प्रक्रिया
विभाग के सूत्रों ने बताया कि बालूघाटों की बंदोबस्ती को लेकर पहले भी कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए गए हैं।
अधिकारियों से कहा गए है कि वे जिला समाहर्ता के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र निविदा आमंत्रित करें और पारदर्शी तरीके से नीलामी प्रक्रिया को पूरा करें।
समय पर नीलामी और स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी होने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि निर्माण कार्यों के लिए बालू की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।


