प्रखंड के करनामेपुर बाजार स्थित शिव मंदिर का ऐतिहासिक तालाब आज बदहाली और अतिक्रमण की मार झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि इसे तालाब कम और कचरा डंपिंग ग्राउंड अधिक कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
बाजार से निकलने वाला कचरा लगातार तालाब में फेंके जाने के कारण इसका पानी जहरीला हो चुका है और उसमें पैर रखना तक मुश्किल हो गया है। तालाब के सीढ़ीनुमा घाटों पर कचरा फैला हुआ है और तालाब में जलकुंभी लगा हुआ है।
अतिक्रमण के कारण सिमटा तालाब का अस्तित्व
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन दशक पहले यह तालाब हरा-भरा और स्वच्छ हुआ करता था। चारों ओर छोटे-छोटे झुरमुट थे तथा श्रद्धालु तालाब में स्नान कर समीप स्थित शिव मंदिर में जलाभिषेक करने जाते थे। लेकिन समय के साथ बाजार का विस्तार होता गया और अतिक्रमण के कारण तालाब का अस्तित्व सिमटता चला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कई बार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अधिकारियों से पत्राचार किया गया। यहां तक कि लोगों ने एक कमिटी बनाकर पोखरा बचाओ अभियान भी चलाया।
अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं
प्रशासन द्वारा कई बार तालाब की पैमाइश भी कराई गई। लेकिन अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। स्थानीय दिनेश मिश्र व कई ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दबंगों और प्रशासन की मिलीभगत के कारण तालाब को अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया जा रहा है।
बताया जाता है कि पहले तालाब का क्षेत्रफल करीब सात कठ्ठा था, जो अब घटकर लगभग पांच कठ्ठा रह गया है। पूर्व सांसद द्वारा तालाब के किनारे छठ घाट का निर्माण कराया गया था। वहीं कुछ माह पूर्व पंचायत द्वारा करीब नौ लाख रुपये की लागत से घाट निर्माण भी कराया गया। बावजूद इसके तालाब की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका।
प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या जस की तस
वरिष्ठ भाजपा नेता सह संघ प्रचारक शम्भू शरण मिश्रा ने बताया कि तालाब की सफाई और संरक्षण को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
पोखरा बचाने के आंदोलन से जुड़े सुनील मिश्रा ने कहा कि आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार धमकियां भी मिलीं। लेकिन अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आवेदन देते-देते फाइल मोटी हो गई। लेकिन तालाब की हालत नहीं बदली।


