जिला अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगवाने के मामले में कार्यवाहक सीएमएस ने नाकामी छिपाने के लिए चंद घंटों में जांच पड़ताल कर समिति की जो रिपोर्ट जिलाधिकारी के पास भेजी है, उसमें कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे पहले यह कि तीन डॉक्टरों की समिति ने पूरे प्रकरण में बरती लापरवाही का ठीकरा केवल डेटा ऑपरेटर पर फोड़कर खानापूर्ति की है। दूसरा यह है कि समिति के एक जांच अधिकारी की दिसंबर 2025 में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की विशेष सचिव से शिकायत हो चुकी है। तो क्या उन्होंने जांच सही तथ्यों पर की हुई हाेगी ?
दैनिक जागरण के पास जिलाधिकारी को भेजी गई जांच समिति की रिपोर्ट
यही नहीं, समिति ने पोर्टल पर ऑर्डर अप्रूव करने वाले प्रमुख व्यक्ति की लापरवाही क्यूं नहीं मानी ? फिलहाल, सपा नोएडा महानगर अध्यक्ष ने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखौरी ने निरीक्षण कर वेटनरी सिरिंज मंगवाने जैसे गंभीर प्रकरण में जांच समिति की रिपोर्ट दैनिक जागरण के पास है।
इसमें लिखा है कि कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अजय राणा के निर्देश पर 3 अप्रैल को तीन सदस्यों की जांच समिति गठित की गई, जिसमें डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. अरविंद मलिक और डॉ. पंकज त्रिपाठी हैं। आश्चर्य की बात है कि समिति ने जेम पोर्टल पर गलत ऑर्डर देने का पूरा ठीकरा आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी योगेश कुमार पर फोड़ दिया।
डॉ. अजय राणा, कार्यवाहक सीएमएस
मगर टीम ने उस अहम बिंदु को छोड़ दिया, जिसमें ऑर्डर देने की प्रक्रिया से लेकर सामान आने तक जो सदस्य निगरानी करते हैं। उनके बयान दर्ज किए और न ही कोई सवाल पूछकर जांच रिपोर्ट में शामिल किया। सवाल है कि चंद घंटे में तैयार हुई जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर को भेजकर आला अधिकारी से लेकर जैम पोर्टल की समिति के सदस्यों ने भी नाकामी छिपाने का काम नहीं किया है ?
लखनऊ के एक शीर्ष अधिकारी से हाटलाइन पर हो गई डील!
शनिवार को अस्पताल में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि बड़े चिकित्सक ने प्रकरण में अपनी कुर्सी बचाने के लिए लखनऊ के शीर्ष अधिकारी से हाटलाइन पर डील पक्की कर ली है। बीती रात में अलग-अलग समय पर हुई वार्ता के बाद चिकित्सक काे संपूर्ण सुरक्षा का आश्वासन मिलने से वह चिंतामुक्त हैं।
सूत्र बताते हैं कि समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों पर अपने हिसाब से खंडन बनवाकर भी लखनऊ में उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। सूत्र यह भी बताते हैं कि इस हाइवोल्टेज मामले को शांत करने के लिए लखनऊ में बैठे उच्च अधिकारी के घर पर संपर्क किया गया था।
विशेष सचिव के निरीक्षण से पहले दिया गया ऑर्डर
बता दें कि जिला अस्पताल में सरकारी जेम पोर्टल पर 25 दिसंबर को जानवरों की सिरिंज मंगाने का ऑर्डर दिया गया था। उसके अगले दिन ही चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखौरी ने निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की थी।
अव्यवस्था पर भड़कते हुए उन्होंने बाल रोग विभाग, जनरल और ऑनलाइन ओपीडी में डाक्टरों को बिना संसाधन मरीजों की जांच करते देखकर अस्पताल प्रबंधन को भगवान भरोसे चलने वाला तक कह दिया था। वहीं मरीजों की भीड़ देखकर अधिकारियों से कड़े सवाल पूछकर व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया था। इसी बीच खोड़ा के सौराज सिंह ने विशेष सचिव से जिला अस्पताल में आंखों का गलत आपरेशन कर तीन-तीन लैंस लगाने का आरोप लगाया था।
सपा अध्यक्ष ने कसा सरकार पर तंज
सपा नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने सोशल मीडिया पर जानवरों की सिरिंज मंगवाने के प्रकरण में दैनिक जागरण में प्रकाशित खबरों को अपलोड कर सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा है, अब यूपी में जनता की कीमत कुछ नहीं रही।
नोएडा जैसे हाइटेक शहर में जब घोटाले और लापरवाही चरम पर है तो सोचिए पूरे प्रदेश का हाल होगा ? कार्यवाहक सीएमएस पिछले एक साल से, लगातार घोटाले, पोस्टमार्टम और पार्किंग के बहाने पैसे लेने, ट्रेनी डॉक्टर से ट्रीटमेंट, टेंडर में ही घोटाला, वो भी जनता की जान से खिलवाड़ करके। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से कार्रवाई करने की बात कही है।


