अक्सर हम आंखों के डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब हमें धुंधला दिखने लगता है या चश्मे की जरूरत महसूस होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंखों की नियमित जांच आपके पूरे शरीर की सेहत का आईना हो सकती है?
जी हां, आंखों की नियमित जांच सिर्फ नजर का टेस्ट नहीं है, बल्कि यह समय रहते शरीर की कई गंभीर बीमारियों का अलर्ट दे सकती है। आइए जानें आंखों के टेस्ट किन बीमारियों का संकेत दे सकते हैं।
आंखें हैं शरीर का आईना
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के अनुसार, हमारी आंखें शरीर की नसों और ब्लड वेसल्स की एक साफ झलक पेश करती हैं। जब डॉक्टर एक स्पेशल आई ड्रॉप्स की मदद से आपकी पुतलियों को फैलाकर आंखों के अंदरूनी हिस्से का बारीकी से जांच करते हैं, तो उन्हें शरीर में पनप रही कई गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं।
आंखों के जरिए पहचानी जाने वाली गंभीर बीमारियां
आंखों की जांच से न केवल मोतियाबिंद या ग्लूकोमा, बल्कि इन बड़ी समस्याओं का भी पता लगाया जा सकता है-
- हाई ब्लड प्रेशर- अगर आंख के पीछे की नसें असामान्य दिख रही हैं, उनमें सूजन है या खून के धब्बे नजर आ रहे हैं, तो यह हाई बीपी का साफ संकेत हो सकता है।
- ब्रेन ट्यूमर- दिमाग में ट्यूमर होने पर दबाव बढ़ता है जो आंखों की ऑप्टिक नर्व तक पहुंच जाता है। इसके संकेतों में ऑप्टिक नर्व में सूजन, डबल दिखना, पुतली के आकार में बदलाव या साइड विजन का कम होना शामिल है।
- स्ट्रोक का खतरा- रेटिना की नसों में ब्लॉकेज या थक्के बनने से नजर के सामने धुंधले धब्बे या पर्दे जैसा महसूस हो सकता है। यह भविष्य में स्ट्रोक आने का एक बड़ा चेतावनी संकेत है।
- थायरॉयड- अगर आपकी आंखें बाहर की तरफ उभरी हुई दिख रही हैं या पलकें पीछे की ओर खिंच रही हैं, तो यह थायरॉयड की समस्या की ओर इशारा करता है।
- डायबिटीज- रेटिना की नसों से खून या पीले रंग के फ्लूड का निकलना डायबिटिक रेटिनोपैथी का संकेत है। समय पर जांच से मरीज अपनी आंखों की रोशनी बचा सकते हैं।
- एसटीडी- हैरानी की बात यह है कि आंखें सिफिलिस, हर्पीज और एचआईवी जैसी बीमारियों के लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
आंखों को भी हो सकता है सनबर्न?
त्वचा की तरह हमारी आंखों को भी धूप से नुकसान पहुंच सकता है, जिसे फोटोकेराटाइटिस कहा जाता है। तेज यूवी लाइट के संपर्क में रहने से आंखों में रेडनेस, जलन और तेज दर्द हो सकता है, जो कॉर्निया पर खरोंच जैसा महसूस होता है। हालांकि, यह 1-2 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इसके लिए ठंडी सिकाई और डॉक्टर की सलाह पर आई ड्रॉप्स लेना जरूरी होता है।


