बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, तमिलनाडु में विजय की विक्ट्री; केरल में UDF को बहुमत

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने कई स्थापित राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया है। बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन हुआ है, जहां ऐतिहासिक जीत के साथ भाजपा की पहली बार सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। पार्टी ने 200 के आंकड़े को भी पार कर लिया और ममता बनर्जी की पार्टी दो अंकों में सिमट गई।

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को स्पष्ट बढ़त मिली है, जबकि असम और पुडुचेरी में भाजपा ने अपनी सत्ता बरकरार रखी है।

इन चुनावों ने राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की बढ़ती ताकत, क्षेत्रीय दलों की चुनौतियां और कांग्रेस की सीमित वापसी को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। नतीजों ने वाम दलों को पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया है। अब पूरे देश में सत्ता से उनका सफाया हो गया है।

बंगाल में 200 के पार भाजपा

बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने दो सौ का आंकड़ा पार कर अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। यह राज्य की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस इस बार सौ के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकी।

सीमावर्ती, आदिवासी व औद्योगिक क्षेत्रों में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला, जबकि तृणमूल कांग्रेस शहरी व कुछ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित रह गई। चुनाव प्रचार के दौरान ध्रुवीकरण, मतदाता सूची और ईवीएम सुरक्षा जैसे मुद्दों ने माहौल को तनावपूर्ण बनाए रखा।

हालांकि हार के बाद ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। समाचार लिखे जाने तक भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी भवानीपुर में ममता बनर्जी से मामूली अंतर से आगे चल रहे थे, वहीं नंदीग्राम से उन्होंने जीत हासिल कर ली थी।

तमिलनाडु में विजय की पार्टी को मिली सबसे ज्यादा सीटें

तमिलनाडु में 234 सीटों के चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे बड़ा उलटफेर किया। बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े की ओर बढ़ते हुए टीवीके ने द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक द्विध्रुव को तोड़ दिया है।

द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक दोनों ही पीछे छूट गए। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट तक नहीं बचा सके। विजय की नई छवि, संतुलित बयानबाजी और लोकलुभावन वादों ने मतदाताओं को आकर्षित किया है।

एमजीआर और जयललिता के बाद यह पहला अवसर है जब किसी फिल्मी व्यक्तित्व को इतनी व्यापक राजनीतिक स्वीकृति मिली है

केरल में UDF को बहुमत

केरल में दस वर्षों के बाद सत्ता परिवर्तन के संकेत स्पष्ट हैं। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बहुमत की ओर बढ़त बनाई है। यहां लंबे समय से वामपंथी एलडीएफ की राजनीति मजबूत थी, जो इस बार पूरी तरह पिछड़ गया।

हालांकि नतीजे बता रहे हैं कि कांग्रेस को सुकून से सरकार बनाने-चलाने के लिए सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा।

यूडीएफ के बहुमत में आते ही वाम दलों का देश में आखिरी मजबूत गढ़ भी कमजोर हो गया है। यहां यूडीएफ के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हार गए, हालांकि मुख्यमंत्री पी. विजयन जीत गए हैं। हार के बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

असम में BJP की हैट्रिक

असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। 126 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी ने सहयोगियों के साथ मिलकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है।

हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और घुसपैठ के मुद्दे पर निर्णायक काम किया था। इसके सामने कांग्रेस पूरी तरह पिछड़ गई और उसके मुख्यमंत्री पद के दावेदार गौरव गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा। वहीं हिमंत ने छठी बार जीत हासिल की है।

भाजपा ने पूरे चुनाव के दौरान सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखा, जिसका लाभ मिला। पुडुचेरी में भी राजग ने अपना प्रदर्शन दोहराते हुए सत्ता बरकरार रखी।

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